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रिश्वत लेते वीडियो वायरल होने पर पांच सिपाही निलंबित

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रिश्वत लेते वीडियो वायरल होने पर पांच सिपाही निलंबित
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सीतापुर। पांच पुलिसकर्मियों के शनिवार देर रात रिश्वत लेते तीन वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया। सीओ सिधौली के सीयूजी नंबर पर भी किसी ने ये वीडियो भेजे तो उन्होंने तत्काल कप्तान को इसकी सूचना दी। एसपी के निर्देश पर सीओ ने पांचों पुलिसकर्मियों की पहचान कराई।


पता चला कि चार पुलिसकर्मी एसपी ऑफिस व एक सिपाही सीओ सिधौली के ही ऑफिस का है। सीओ ने सिधौली कोतवाली में पांचों पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराकर एसपी को मामले की रिपोर्ट भेजी। इस पर एसपी ने पांचों पुलिसकर्मियाें का सस्पेंड करके सीओ बिसवां का मामले की जांच सौंपी है।
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पुलिस सूत्रों की मानें तो शनिवार रात सीओ सिधौली अंकित कुमार के सीयूजी नंबर के व्हाट्सएप पर एक शख्स ने तीन वीडियो भेजे। सीओ ने वीडियो डाउनलोड कर देखे तो उनमें वर्दी पहने पुलिसकर्मी किसी से पैसे ले रहे थे।


इस पर सीओ ने तत्काल इसकी जानकारी एसपी एलआर कुमार को दी और उन्हें तीनों वीडियो भी भेजे। इस पर कप्तान ने सीओ को वीडियो में पैसे ले रहे सभी पुलिसकर्मियों की पहचान कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए।


एक वीडियो में पैसे ले रहा पुलिसकर्मी सीओ सिधौली के ही दफ्तर का कंप्यूटर ऑपरेटर योगेश चंद्र उपाध्याय है। जिसे सीओ ने पहचान लिया।


सीओ ने बताया कि दो अन्य वीडियो में पैसे लेते दिखे पुलिसकर्मी एएसपी उत्तरी महेंद्र प्रताप चौहान के कार्यालय का सिपाही हिमांशु गंगवार, दूसरा संजय पटेल, तीसरा सिपाही डीसीआरबी में तैनात पवन कुमार और चौथा आईजीआरएस में तैनात सिपाही मनोज सिंह है।


पांचों पुलिसकर्मियों की पहचान कराने के बाद सीओ ने रिपोर्ट तैयार कर एसपी को भेजी। एसपी ने मामले में केस दर्ज कराने के आदेश दिए। देर रात सीओ ने सिधौली कोतवाली में खुद तहरीर देकर पांचों सिपाहियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी।


इसके बाद कप्तान ने पांचों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए। कप्तान ने मामले की जांच सीओ बिसवां समर बहादुर को सौंपी है। सीओ बिसवां का कहना है कि मामले की जांच कर एसपी को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।


उधर रिश्वत लेने के मामले में कप्तान की बड़ी कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। सीओ अंकित कुमार का कहना है कि अब तक की जांच में सामने आया है कि सस्पेंड हुए पुलिसकर्मियों ने शस्त्र लाइसेंस आवेदन की फाइलें पास कराने के लिए लोगों से रिश्वत ली थी।


सीओ सिधौली अंकित कुमार का कहना है कि वायरल तीनों वीडियो जनवरी माह के बने हैं। मगर तीन माह बाद उन्हें क्यों वायरल किया गया, इसकी भी जांच की जाएगी। बताया कि वीडियो बनाने वाले की भूमिका की भी जांच होगी, क्योंकि उसने वीडियो वायरल करने में काफी समय लगाया।
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ये भी आशंका है कि वीडियो बनाने वाले ने इन पुलिसकर्मियों से डीलिंग करने की भी कोशिश की और जब कामयाब नहीं हुआ तो वायरल कर दिया। मामले में किसी भानु प्रताप सिंह का नाम सामने आ रहा है। जांच कराकर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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