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दरोगा बनने की चाहत में चार गिरे, पहुंचे अस्पताल

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दरोगा भर्ती के अंतिम दिन भी खलनायक बना रहा उमस भरा मौसम, दौड़ में फिर कई अभ्यर्थियों की फूली सांसें
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सीतापुर। दरोगा भर्ती दौड़ के लिए सोमवार का दिन अंतिम दिन था। इस वजह से 11 वीं वाहिनी पीएसी मैदान की रौनक देखते ही बन रही थी। मैदान में पहुंचे युवा हर हाल में लक्ष्य को पा लेना चाह रहे थे। यही वजह थी कि कोई दौड़ के लिए शरीर दुरुस्त कर रहा था, तो कोई अपने जूतों के फीते कस रहा था।

हर अभ्यर्थी इस कदर तैयारी कर रहा था कि उसे दौड़ के दौरान कोई बाधा न आने पाए। अभ्यर्थियों ने तो तैयारी पूरी की थी, लेकिन मौसम उन्हें बख्शने को तैयार नही था। यही वजह रही कि जब अभ्यर्थी ट्रैक पर उतरे तो उमस भरे मौसम ने उन्हें बेहाल कर दिया। कईयों की सांस फूलने लगी, कई पस्त होकर ट्रैक पर ही गिर गए।
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चार अभ्यर्थी तो इस कदर पस्त हुए कि उन्हें जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। सोमवार को दरोगा भर्ती दौड़ का अंतिम दिन था। वक्त सुबह का था, बावजूद इसके उमस भरा मौसम सभी को परेशान कर रहा था। ऐसे में सुबह कुल 348 अभ्यर्थी दौड़ पूरी करने के लिए मैदान पर उतरे।

दौड़ के दौरान ही लखनऊ के त्रिवेणी नगर निवासी नितेश वर्मा (26), खदरा हसनगंज निवासी अजीत कुमार (28), कानपुर के चौबेपुर निवासी रवी कुमार व औरैया के मानिकपुर निवासी स्केंद्र कुमार (25) बेहाल होकर ट्रैक पर गिर गए।

इन चारों की हालत इस कदर बिगड़ी कि उन्हें उपनिरीक्षक अश्वनी कुमार ने जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उनकी हालत नाजुक देख भर्ती कर लिया। सुबह के वक्त हुई दौड़ में महज 272 अभ्यर्थी ही लक्ष्य को प्राप्त कर सके। जबकि 76 अभ्यर्थी फेल हुए। इसी तरह से शाम को भी दौड़ कराई गई। इसमें करीब 80 अभ्यर्थियों ने दौड़ लगाई।

जिनका रिजल्ट नहीं आ पाया था। अधिकारियों का कहना था कि इस दौड़ में छूटे हुए अभ्यर्थियों की दौड़ होनी है, इस वजह से प्रयास यह है कि जो अन्य अभ्यर्थी बाकी रह गए हों, उन्हें भी दौड़ का मौका मिल जाए। इस मौके पर एसडीएम प्रभाकांत अवस्थी, एएसपी मधुबन सिंह व सीओ पवन गौतम, आरआई चंद्रप्रकाश मिश्र मौजूद थे।

पस्त जरूर हुए लेकिन जीत लिया मैदान
दरोगा भर्ती दौड़ में लखनऊ के नीतेश वर्मा व कानपुर के रवी कुमार ने लक्ष्य को पाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। निश्चित समय में दौड़ पूरी करते हुए उनकी सांसें उखड़ रहीं थी। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इसके बावजूद उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने की चिंता था।

यही वजह रही कि हांफते कदमों से दोनों युवकों ने दौड़ तो पूरी कर ली, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने के बाद उनकी शरीर ने जवाब दे दिया। नतीजा दौड़ पूरी करने के बाद दोनों ट्रैक के करीब ही गिर गए। जिसकी वजह से वहां पर मौजूद अमले को बेहाल अभ्यर्थियों को जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

यहां पर जब दोनों जवानों की हालत में सुधार हुआ, तब वे बोले, भाई मैदान तो मार लिया। अब चाहे पस्त हो जाऊं या फिर परेशान। उनके चेहरे पर जीत की खुशी साफ झलक रही थी।
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मौसम में नरमी का इंतजार
सुबह के वक्त दौड़ में जब चार जवान पस्त हो गए और उन्हें अस्पताल पहुंचाना पड़ा। यह देखकर वहां की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों को सोचने पर मजबूर होना पड़ा। यही वजह रही कि जिम्मेदार शाम के वक्त मौसम में नरमी होने का इंतजार करते नजर आए। देर शाम तक दौड़ की प्रक्रिया को पूरा कराया गया।
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