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अदालती आदेश से फर्जी साबित हुई बरामदगी

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महमूदाबाद कोतवाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश
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सीतापुर। वाहवाही लूटने के लिए पांच आरोपियों की नकदी व असलहों के साथ की गई गिरफ्तारी में महमूदाबाद पुलिस शनिवार को खुद आरोपों के घेरे में आ गई। तलब की गई सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रहलाद टंडन ने पुलिस की कहानी को अविश्वसनीय करार देते हुए कोतवाल रंजना सचान व फर्द बरामदगी में अंकित उनकी टीम के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज किए जाने के आदेश दिए।

न्यायालय ने आदेश का अनुपालन एक सप्ताह में सुनिश्चित करने के लिए एसपी को निर्देशित किया है। मालूम हो कि पिछले दिनों महमूदाबाद में मेंथा ऑयल चोरी की कई वारदातें हुई थीं। जिनका खुलासा क्षेत्रीय पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था।
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इसी क्रम में 29 जनवरी 2018 को कोतवाली प्रभारी रंजना सचान की अगुवाई में करीब दर्जन भर पुलिस कर्मियों ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर, मेंथा ऑयल चोरी की करीब सभी वारदातों के खुलासे का दावा किया। पुलिस कार्रवाई में जेल भेजे गए एक आरोपी महमूदाबाद के लखनीपुर निवासी अजीत कुमार की जमानत प्रार्थना पत्र सुनवाई के दौरान इस मामले ने एक अलग मोड़ ले लिया।

जिसमें कुल पुलिस कार्रवाई को ही आरोपों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया। आरोपी अजीत की मां सुमन देवी की तरफ से न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र के साथ एक अन्य प्रार्थना पत्र देकर जब बरामद किए गए 24 हजार रुपयों को अपना बताते हुए आरोप लगाया कि ये रुपये अजीत से ही पुलिस द्वारा एटीएम से निकलवाए गए।

बाद में उसी के पास से मेंथा ऑयल बिक्री के रूप में बरामद करा दिए गए। तब न्यायालय ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए एटीएम से निकाली गई राशि की पुष्टि के लिए एटीएम के सीसीटीवी फुटेज को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने का आदेश दिया। न्यायालय में जब महमूदाबाद कोतवाली के पड़ोस स्थित एक्सिस बैंक के एटीएम के फुटेज देखे गए, तब एक ऐसा सच सामने आया।

जिसने समूची पुलिस कार्रवाई पर ही सवाल खड़ा कर दिया। सीसीटीवी फुटेज में बाकायदा दो पुलिसकर्मी आरोपी अजीत से रुपये निकलवाते हुए नजर आए। जिसका संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने इस कुल पुलिस कार्रवाई को एक गैंग के रूप में पुलिस द्वारा संचालित करते हुए आपराधिक कृत्य करार दिया।

अपने आदेश में न्यायालय ने न सिर्फ कुल बरामदगी को ही संदेहास्पद बताया, बल्कि इसे पुलिस द्वारा किया गया अपराध बताते हुए पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि इस संबंध में बरामदगी के मुकदमे की वादिनी कोतवाल रंजना सचान सहित टीम में शामिल सभी सदस्यों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए।
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न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि एक सप्ताह में प्राथमिकी की कार्रवाई नहीं होती, तो न्यायालय स्वत: रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
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