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मान्यता रदद, फिर भी चल रहा बालिका गृह

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बीते फरवरी माह में ही महिला कल्याण निदेशालय मान्यता समाप्त करने का सुना चुका है फरमान
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सीतापुर। बालिका संरक्षण गृह इन दिनों पूरे देश में ज्वलंत मुद्दा बना है। बिहार के मुजफ्फरपुर व यूपी के देवरिया जिले में बालिकाओं के शोषण की बात सामने आई थी। इस मसले पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट भी अपनी नाराजगी जता चुका है। पर सीतापुर जिले में जिम्मेदार संवेदनशील नहीं हैं।

शायद यही वजह है कि निदेशालय से जिले में मौजूद बालिका गृह की मान्यता रद्द होने के बावजूद इस केंद्र का संचालन हो रहा है, हालांकि इसके पीछे अधिकारियों का तर्क है कि संबंधित एनजीओ की फाइल चल रही है। बता दें कि जिले में उमा महिला उत्थान समिति बालगृह (बालिका) संचालित करती है।
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हाल ही में आठ फरवरी को महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. अलका टंडन भटनागर ने किशोर न्याय अधिनियम 2000 का हवाला देते हुए समिति का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। उस दौरान हवाला दिया गया था कि संस्था को शासकीय अनुदान दिये जाने के उपरांत खामियां पाई गई हैं।

यह खामियां विभाग द्वारा सोशल आडिट के समय मिली थीं। निदेशक ने जहां बालगृह (बालिका) के संचालन को लेकर मान्यता रद्द करने का आदेश दिया था, वहीं इस बालगृह (बालिका) में मौजूद बालिकाओं को तत्काल राजकीय बालगृह (बालिका) मोती नगर लखनऊ में स्थानांतरित किए जाने के आदेश दिए थे।

निदेशक ने आदेश तो दे दिए लेकिन बालगृह उसी तरह से चल रहा है। इतना जरूर है कि अब बालगृह का स्थान बदलकर दूसरी जगह कर दिया गया है। इन दिनों इस बालगृह में नौ बालिकाएं मौजूद हैं। इनमें दो न्यायालय से संबंधित, चार परिवार द्वारा पालन पोषण न करने पर व तीन लावारिस हैं।

निदेशक ने तो आदेश दे दिए लेकिन यहां के जिम्मेदारों ने उस पर धूल डाल दी। फरवरी से लेकर अब तक पांच माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आदेश पर अमल नहीं किया गया।

ताज्जुब तो इस बात का है कि हाल ही मेें प्रशासन की टीम ने इस बालगृह (बालिका) का निरीक्षण किया। जिसमें सबकुछ दुरुस्त होने की बात कही गई। जबकि इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया कि जिम्मेदार संस्था का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है।

जिलाधिकारी के संज्ञान में है
बालगृह संचालन को लेकर जिलाधिकारी के पास अधिकार होता है। पूरा मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में है। उन्होंने संस्था के रिनीवल के लिए संस्तुति की है। यही वजह है कि इस बालगृह (बालिका) को चलाया जा रहा है।
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-अश्वनी कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी

डीपीओ से ली जाएगी जानकारी
बालगृह (बालिका) के संचालन को लेकर हाल ही में संबंधित अधिकारियों ने बैठक की थी। जिसमें संचालन को लेकर निर्णय लिया गया था। निर्णय क्या है, यह जिला प्रोबेशन अधिकारी ही बताएंगे। अगर संस्था मानक के विपरीत चल रही है, तब कार्रवाई की जाएगी।
-संदीप कुमार, सीडीओ/प्रभारी डीएम

कराई जाएगी जांच
बालगृह के बारे में जानकारी नहीं थी। यदि कोई गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-पुनीत मिश्रा, डिप्टी सीपीओ (उप मुख्य परविक्षा अधिकारी)

विचाराधीन है फाइल
बालगृह (बालिका) के संचालन को लेकर फाइल विचाराधीन है। जिलाधिकारी ने संस्तुति करते हुए फाइल को मंजूरी के लिए भेजा है।
-नागेंद्र गुप्ता, प्रबंधक, उमा महिला उत्थान समिति, संचालक बालगृह (बालिका)
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