गोंदलामऊ (सीतापुर)। स्वदेशी गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र (ट्रस्ट) ब्लॉक क्षेत्र में निराश्रित गोवंशों के संरक्षण के लिए अनूठी पहल कर रहा है। ट्रस्ट की ओर से तेरवा गांव में महिलाओं, किसानों व बेरोजगार युवाओं को गाय के गोबर व गोमूत्र से कई तरीके के उत्पाद बनाना सिखाया रहा है। इन उत्पादों से जहां एक ओर निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। दूसरी ओर यह आय बढ़ाने का भी साधन है।
तेरवा स्थित स्वदेशी गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र (ट्रस्ट) के संस्थापक अध्यक्ष मदन पाल सिंह अर्कवंशी कहते हैं आजकल लोग देशी गोवंशों को अनुपयोगी मानकर सड़कों पर छोड़ देते हैं। ये हमारी अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, धर्म और संस्कृति का आधार हैं। प्रशिक्षणार्थियों को गोबर व गोमूत्र से बनने वाले उत्पाद के प्रशिक्षण के साथ ही देशी गोवंशों के धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व की भी जानकारी दी जाती है। इससे लोगों में गोवंशों के प्रति भावनात्मक रूप से भी जुड़ाव पैदा होगा। उन्होंने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य गांवों में गो आधारित रोजगार उत्पन्न करना है। इससे लोग निराश्रित गाेवंशों का संरक्षण करेंगे। साथ ही ये उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण प्राकृतिक संतुलन में भी मदद करेंगे। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में पुनः ग्रामोद्योग स्थापित होने की उम्मीद है।
गोबर-गोमूत्र से बनाए जाने वाले उत्पाद
ट्रस्ट की ओर से जिन उत्पादों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है उनमें धूपबत्ती, दंत मंजन, माला, सांभ्रनी कप, कंडे और सजावटी सामान शामिल हैं। साथ ही एंटी रेडिएशन मोबाइल चिप, दीपक, तोरण, श्रीयंत्र, मूर्तियां और मोबाइल स्टैंड भी बनाए जा रहे हैं। वहीं गोमूत्र से फिनायल, अर्क और घनबटी जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। ट्रस्ट पदाधिकारियों के मुताबिक दीपावली नजदीक होने के कारण इस समय केवल दीपक, श्रीयंत्र, शुभ-लाभ, स्वास्तिक, धूपबत्ती, सांभ्रनी कप, लक्ष्मी चरण तथा योगी, गणेश व लक्ष्मी जी की मूर्तियां बनाई जा रही हैं।