सीतापुर। बिजली की अघोषित कटौती से कुटीर उद्योग प्रभावित हो रहे है। सबसे अधिक नुकसान आटा चक्की व तेल कोल्हू मालिकों को हो रहा है। दो से तीन दिन बाद लोगों को आटा मिल पा रहा है। इससे चक्की पर स्टॉक लग रहा है, वहीं उनको मजदूरों को दिहाड़ी अधिक देनी पड़ रही है।
जिले में जरूरत के मुताबिक बिजली न मिलने से कुटीर उद्योगों पर खासा असर पड़ रहा हैं। आटा चक्की और तेल कोल्हू का उत्पादन आधा रह गया है। जिससे उनकी आमदनी पर असर पड़ रहा है। लोगों को समय से सामान नहीं मिल पा रहा है। खैराबाद संवाद के अनुसार, नगर में आटा चक्की व तेल कोल्हू मिलाकर 15 कुटीर उद्योग चल रहे है।
आटा चक्की के मालिक अंकित श्रीवास्तव कहते है कि ग्राहकों का गेहूं पीसने के लिए जनरेटर चलाते हैं तो नुकसान हो रहा हैं। तेल कोल्हू के मालिक बब्लू, वकील व विजय का कहना है कि बिजली बार-बार कटने से 30 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ रहा हैं।
20 किलो सरसों में आठ लीटर तेल निकलना चाहिए तो छह लीटर तेल निकल रहा हैं। रामविलास कहते है कि आईस्क्रीम का काम गर्मियों का हैं। बिजली कटौती से काम नहीं कर पा रहे है।
पिसावां संवाद के अनुसार आटा चक्की चला रहे बचान ने बताया कि बिजली न मिलने के कारण ग्राहकों को दो से तीन दिन बाद आटा दे पा रहे है। इसके कारण चक्की पर स्टॉक लग रहा है। अगर समय से बिजली मिलने लगे दो दिन के अंदर यह स्टॉक समाप्त हो जाएगा।
दो दिन बाद भी नहीं मिला आटा
पिसावां के अतुल का कहना है कि दो दिन पहले चक्की पर गेहूं डाला था। दो बार चक्की जा चुके है लेकिन अभी तक गेहूं की पिसाई नहीं हो पाई है। चक्की मालिक द्वारा बिजली न मिलने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है।
बाहर से खरीदा तेल
दीपू का कहना बिजली न आने के कारण सरसों की पेराई के लिए कोल्हू पर डाला था। पेराई नहीं हो पाई तो मजबूरी में बाजार से सरसों का तेल खरीदना पड़ा।