सीतापुर। जिले में कोरोना संक्रमण के मामले भले ही कम हो रहे हो, लेकिन ब्लैक फंगस के मामलों ने लोगों के माथे पर शिकन ला दी है। जिले में ब्लैक फंगस का भले ही कोई मामला सामने न आया हो लेकिन स्वास्थ्य महकमे के पास इस समय न तो इसकी कोई दवा और न ही जांच की सुविधा है। अगर कोई मरीज मिलता है तो उसे भर्ती कहां किया जाएगा, इसकी कोई तैयारी नहीं है। अब महकमा मरीज मिलने का इंतजार कर रहा है। सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि ब्लैक फंगस के इलाज में प्रयोग होने वाली दवा की शासन से मांग की गई है।
महकमे का कहना है कि जब मरीज आएगा तो दवाओं का इंतजाम किया जाएगा। महकमे की यह लापरवाही आम लोगों पर भारी पड़ सकती है। एक तरफ कोरोना की जानलेवा दूसरी लहर ने जिलेवासियों को परेशान कर रखा है। संक्रमण के मामले भले ही कम हो रहे हो, लेकिन मौतों की बढ़ती संख्या से हर कोई चिंतित है। इस लहर के बीच में ब्लैक फंगस के मामले आ रहे है।
ब्लैक फंगस कितना खतरनाक है यह हर कोई समझ रहा है। लेकिन इससे निपटने के लिए जिले का स्वास्थ्य महकमा लापरवाह बना हुआ है। भले ही जिले में अभी तक ऐसा कोई मामला सामने न आया हो, लेकिन पड़ोसी जनपद लखनऊ व गोंडा में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में जिले के लोग भी इस बीमारी को लेकर चिंतित हैं। इस फंगस से कैसे निपटा जाएगा।
इसके लिए स्वास्थ्य महकमे के पास कोई तैयारी नहीं दिख रही है। अगर एक साथ कई मरीज सामने आते हैं तो उनको जिला स्तर पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाएगा। रेफर के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। महकमे का कहना है कि जब मरीज आएगा तो दवाएं व जांच की सुविधा का इंतजाम किया जाएगा।
लक्षण मिलने पर हो जाएं सतर्क
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि म्यूकोरमाइकोसिस के मुख्य लक्षणों में नाक में दर्द, खून आना, नाक बंद होना, नाक में सूजन, दांत या जबड़े में दर्द, दांतों का गिरना, आंखों के सामने धुंधलापन या दर्द, न दिखना, दो दिखाई देना, बुखार, सीने में दर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टियां होना है। यह कभी-कभी दिमाक पर भी असर डालता है।
डॉ. मधु गैरोला ने कहा कि इससे बचने के लिए किसी निर्माणाधीन इलाके में जाने पर मास्क पहने। बगीचे में जाएं तो पैंट या फुल आस्तीन शर्ट व ग्लब्स पहने और ब्लॅड ग्लूकोज स्तर को जांचते रहे, इसे नियंत्रित रखें। हल्के लक्षण दिखने पर जल्दी से डॉक्टर से संपर्क करें। कोविड के रोगियों में अगर बार-बार नाक बंद होती हो या नाक से पानी निकलता रहे। गालों पर काले या लाल चकत्ते दिखने लगे, चेहरे के एक तरफ सूजन हो या सुन्न पड़ जाए, दांतों और जबड़े में दर्द, कम दिखाई दे या सांस लेने में तकलीफ हो तो यह ब्लैक फंगस हो सकता है।
चिकित्सक की सलाह से ही लें दवाएं
आंख अस्पताल की सीएमओ डॉ. मधु भदौरिया ने बताया कि आंख अस्पताल में केवल इमरजेंसी सेवाएं चल रही हैं। अभी तक इस तरह के कोई मामले सामने नहीं आए है। अगर कोई मरीज मिलता है तो उसको ईएनटी चिकित्सक व बेहोशी के डॉक्टर की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही जांच की जरूरत होती है। आंख अस्पताल में ब्लैक फंगस मरीजों के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं है।
इस रोग से वहीं लोग ग्रसित हो रहे है, जिनको कोविड के दौरान लंबे समय तक ऑक्सीजन की जरूरत रही हो। इससे बचाव का अच्छा तरीका है जब आप ऑक्सीजन का उपयोग करें तो उसे साफ तरीके से उपयोग करें। बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी स्टेराइड दवा का इस्तेमाल न करें। कोविड के शुरुआती लक्षण में सात दिन तक स्टेराइड दवा के इस्तेमाल से दूर रहें।