पिसावां (सीतापुर)। सेना में नौकरी कर रहे फौजी का फर्जी सत्यापन कराने आए दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने दरोगा के सामने पचास हजार रुपये की घूस का प्रस्ताव रखा था। लेनदेन की बात सुनकर दरोगा को शक हुआ। कड़ाई से पूछताछ के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। दोनों आरोपी आर्मी में नौकरी कर रहे युवक की मदद के लिए आए थे। आरोपियों के कब्जे से फर्जी दस्तावेज और रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। केस दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की गई है।
एसओ पिसावां भानु प्रताप सिंह ने बताया कि शनिवार की शाम को कस्बे के मुख्य चौराहे पर एसआई सतीश चंद, रमेश कनौजिया चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान दो लोग आए और बताया कि पिसावां के खोजेपुर निवासी कुलदीप सिंह सेना में भर्ती हो गए हैं, जिनका वेरीफिकेशन होना है। दरोगा ने दस्तावेज देखकर कुछ गड़बड़ी लगने पर वेरीफिकेशन करने से मना कर दिया। एसओ का कहना है कि इसके बाद दोनों युवकों ने कुलदीप के गलत पते पर बने दस्तावेज देते हुए पचास हजार रुपये का आफर दिया, इस पर शक और गहरा गया।
पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि वेरीफिकेशन में कुलदीप का अस्थाई पता फलेदा तहसील जेवर थाना रबूपुरा जनपद गौतमबुद्धनगर है। एसओ ने बताया कि दोनों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई। आरोपियों ने अपना नाम कपिल सिंह निवासी सेहरा थाना भवन बहादुरपुर जिला बुलंदशहर, वहीं दूसरे ने प्रमोद कुमार जाट निवासी अनहेड़ा थाना अगोता बुलंदशहर बताया।
आरोपियों ने कुबूला कि वे लोग रुपये कमाने के लिए फर्जी तरीके से अभिलेख तैयार करके लोगों को फर्जी तरीके से नौकरी दिलाते हैं। सत्यापन में भी फर्जी दस्तावेज लगाकर सत्यापित करा देते थे। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि कुलदीप उनका दोस्त है। सीतापुर में भर्ती आसानी से होती है।
एसओ भानुप्रताप सिंह ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से फर्जी पते पर बने आधार, पैनकार्ड, निवास प्रमाण पत्र, दो मोबाइल, 96 हजार पांच सौ रुपये बरामद किए गए हैं। मामले में कपिल, प्रमोद के खिलाफ फर्जीवाड़ा समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। एसओ का कहना है कि दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
2019 से नौकरी कर रहा कपिल
आरोपियों के पकड़े जाने के बाद एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पूछताछ में दोनों ने बताया कि सीतापुर के पते से आसानी से सेना में नौकरी मिल जाने की वजह से यहां के पते पर फर्जी दस्तावेज बनवाकर वर्ष 2019 में कपिल को सेना में भर्ती कराया था। उसके वेरीफिकेशन के लिए अब यहां आया था।
महिला प्रधान की शिकायत पर संजीदा नहीं हुई थी पुलिस
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि जिस खोजेपुर गांव के पते पर कपिल सेना में नौकरी कर रहा है, वहां की महिला प्रधान संतोष कुमारी को इस तरह के मामले की भनक लगी थी। इसको लेकर उन्होंने पुलिस को तहरीर दी थी, जिसमें फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे व्यक्ति की शिकायत की गई थी, लेकिन पिसावां पुलिस ने तब इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस अगर संजीदा हुई होती तो खुलासा पहले ही हो सकता था।
अफसर भी सवालों के घेरे में
आरोपियों के कब्जे से बरामद हुए आधार, पैनकार्ड, निवास प्रमाण पत्र सभी पिसावां के ही बने हुए हैं, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बाहरी जिले के व्यक्ति का यह दस्तावेज कैसे बना दिए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कहीं न कहीं इस तरह का काम करने वाले सरकारी अफसर भी बराबर के जिम्मेदार हैं, लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या इसकी भी जांच और कार्रवाई होगी। देर रात एएसपी साउथ एनपी सिंह, सीओ मिश्रिख सुुशील यादव ने मौके पर पहुुंचकर जांच की थी। आरोपियों के जिले के अफसरों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी देते हुए पुष्टि भी की।
इसलिए सीतापुर का पता देते हैं दस्तावेजों में
एएसपी एनपी सिंह ने बताया कि पश्चिमी यूपी के लोगों की कद काठी ठीक होती है। इसलिए सेना में भर्ती के लिए कंपटीशन होता है। ज्यादा लोग होते हैं तो दिक्कत भी होती है, लेकिन सीतापुर के लोगों को लेकर ऐसा नहीं है। इधर के लोग दुबले पतले होते हैं। इसलिए वहां के लोग पता सीतापुर का दिखाकर कंपटीशन में पास हो जाते हैं।
फर्जी फौजी पर भी केस दर्ज
एसओ पिसावां ने बताया कि गिरफ्तार हुआ कपिल भी सेना में रह चुका है। 2013 में नौकरी मिली थी, लेकिन संगीन आरोप लगने के बाद 2014 में निकाल दिया गया था। एसओ ने बताया कि मौजूदा समय में नौकरी कर रहे फौजी कुलदीप पर भी फर्जीवाड़े का केस दर्ज किया गया है।