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जिला अस्पताल में बुखार से एक और बच्ची ने दम तोड़ा, तीन और बच्चे भर्ती

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जिला अस्पताल के मेडिकल बी वार्ड में भर्ती मरीज। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। वायरल फीवर का प्रकोप बच्चों के लिए लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। मंगलवार को चिल्ड्रेन वार्ड में एक बच्ची की मौत हो गई है। परिजनों ने बताया कि बच्ची को बुखार व झटके आ रहे थे। बुखार से पीड़ित तीन और बच्चे भर्ती हुए हैं। चिल्ड्रेन वार्ड में दो सप्ताह में 109 बच्चे भर्ती हो चुके हैं।
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मंगलवार को सदरपुर इलाके के लहाना निवासी जाह्नवी (डेढ़ साल) को परिजन जिला अस्पताल लेकर आए। परिजनों ने बताया, जाह्नवी को कई दिन से बुखार व झटके आ रहे थे। चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया है। कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। इसके अलावा पिसावां इलाके की कुसुम (7), इमलिया इलाके की रीश सिंह (8) व पसनैका निवासी सुशीला (10) को तेज बुखार आ रहा था।
पहले इनके परिजनों ने प्राइवेट अस्पताल में दिखाया, जब फायदा नहीं हुआ तो परिजनों ने जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया। इससे इस वार्ड में पिछले दो सप्ताह में 109 बच्चे बुखार से संक्रमित होने पर भर्ती किए गए हैं।
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जिला अस्पताल में डेंगू मरीज के लिए अलग से एक वार्ड बना दिया गया है। इस वार्ड में 10 बेड रिजर्व किए गए है। लेकिन यहां पर सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। कई दिनों से मीडिया में जब डेंगू वार्ड की अव्यवस्थाएं की खबरें प्रकाशित हुई तो मंगलवार को अस्पताल प्रशासन ने यहां पर बेडों पर मच्छरदानी लगवाने की कवायद शुरू की है। मच्छरदानी के लिए बेड पर रॉड की वेल्डिंग की जा रही है।
बुखार की दवा का स्टॉक समाप्त
जिला अस्पताल में दवाओं का स्टॉक लगातार कम होता जा रहा है। अधिकतर दवाओं की किल्लत होती जा रही है। मंगलवार को दवा काउंटर पर मरीजों को बुखार की दवा पैरासिटामॉल टेबलेट भी नहीं दी जा रही थी। इस दवा का स्टॉक समाप्त हो गया है। जबकि पहले से ही आंख, नाक व कान के ड्राप समाप्त थे। एंटी एलर्जी की दवा समाप्त हो गई थी। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को अब दवाएं मिलना भी मुश्किल हो रहा है। वह बाहर से महंगी दवा लेने को मजबूर हैं।
‘बाहर से दवा खरीदना मजबूरी’
रामासरे ने बताया कि जिला अस्पताल में दवाएं नहीं हैं। बुखार की दवा मंगलवार को नहीं मिली है। बाहर से मजबूरी में खरीदनी पड़ी है। विपिन का कहना है कि अस्पताल में बहुत भीड़ हो रही है। कई चिकित्सक सुबह से इंतजार करने के बाद भी नहीं मिले है। इससे दिक्कतें आ रही है। अनुराग का कहना है कि अस्पताल में दवाओं की किल्लत है। पर्चा पर दवा लिखने के बाद भी काउंटर से वापस कर दिया जाता है।
पास में लिटाए जा रहे बच्चे
चिल्ड्रेन वार्ड में बच्चों की तादाद रोजाना बढ़ रही है। लेकिन यहां पर सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मलेरिया से ग्रसित मरीजों को एक ही साथ अन्य बच्चों के साथ बेड पर लिटाया जा रहा है। जबकि इससे प्रभावित बच्चों के लिए अलग से बेड व मच्छरदानी होनी चाहिए। जिससे उस बच्चे से कोई दूसरा संक्रमित न हो। लेकिन यहां पर ऐसी कोई सुरक्षा नहीं बरती जा रही है।
फीवर डेस्क पर नहीं मिले कर्मी
जिला अस्पताल में फीवर डेस्क बनी हुई है। इस डेस्क पर मरीज जानकारी ले सकते हैं। मंगलवार को अमर उजाला टीम करीब 12 बजे इस डेस्क पर पहुंची तो यहां पर कोई भी कर्मचारी नहीं मिला। डेस्क पर सन्नाटा पसरा हुआ था। इससे कई मरीज इस डेस्क पर आए, लेकिन कर्मचारी न होने के चलते वापस चले गए।
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