फोटो-10अरहर की फसल दिखाते प्रगतिशील किसान अमर सिंह।
सीतापुर। गांजरी क्षेत्र के ब्लॉक सकरन के प्रगतिशील किसान अमर सिंह वैज्ञानिक विधि से अरहर की खेती कर रहे हैं। उन्हें इसमें अधिक मुनाफा हो रहा है। वह युवा किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। गांव के दूसरे किसानों को भी वैज्ञानिक तरीके बताते हैं। इससे अन्य किसान भी उत्साहित होकर नई तकनीक से अरहर की खेती कर रहे हैं। इससे जिले में अरहर की फसल का रकबा बढ़ेगा।
अमर सिंह सकरन ब्लॉक के उमरकलां गांव के निवासी हैं। उनके पास पांच एकड़ जमीन है। पहले कई सालों तक वह पारंपरिक तरीके से खेती करते थे। धान, गेहूं , गन्ना और अरहर की फसल लगाते थे। इसमें लागत ज्यादा और मुनाफा कम होता था। कई बार बारिश कम होने या कीट लगने से फसल बर्बाद हो जाती। परिवार की मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं। वर्ष 2019 में उनका चयन कृषि विज्ञान केंद्र कटिया की समूहबद्ध अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन योजना के तहत हुआ। वह कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के कृषि वैज्ञानिकों से मिले और उनकी सलाह लेकर अरहर की खेती को वैज्ञानिक पद्धति से करना शुरू किया। उन्होंने समय-समय पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त कर खेती की हर प्रक्रिया को बेहतर बनाया। केवीके के माध्यम से पहले उन्होंने अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पोषक तत्वों की कमी जानकर संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग किया। बीज को बोने से पहले ट्राइकोडर्मा और राइजोबियम से उपचारित किया। जिससे फसल में रोगों का खतरा काफी कम हो गया।
अमर सिंह ने बोआई जून के आखिरी सप्ताह में की। पौधों के बीच 45 × 15 सेंटीमीटर की दूरी रखी। खास बात यह रही कि उन्होंने रेज्ड बेड (मेढ़/रिज) विधि से बोआई की। इससे अधिक वर्षा होने पर भी खेत में जलभराव नहीं हुआ और पौधों की जड़ों को सड़ने से बचाया जा सका। फसल का विकास बेहतर हुआ और हवा व सूर्य का प्रकाश भी अच्छे से मिला। सिंचाई उन्होंने जरूरत के अनुसार ही की। रासायनिक खादों में डीएपी, यूरिया और पोटाश का संतुलित उपयोग किया। साथ ही जैविक खाद वर्मी कंपोस्ट भी डाली। कीटों व रोग के नियंत्रण के लिए नीम की खली और बाविस्टिन जैसी जैविक दवाओं का प्रयोग किया। केवल जरूरत पड़ने पर ही रासायनिक दवा का इस्तेमाल किया।
आठ क्विंटल प्रति एकड़ हो रही पैदावार
अमर ने बताया कि नई तकनीक से इस बार 8 क्विंटल प्रति एकड़ अरहर हुई। उन्होंने करीब एक हेक्टेयर में अरहर लगाई थी। उनके खेत में करीब 20 क्विंटल अरहर पैदा हुई। इससे उन्हें सवा लाख रुपये का मुनाफा हुआ। खर्चा घटा और मुनाफे में भी वृद्धि हुई। अमर सिंह अब अपने गांव के दूसरे किसानों को भी वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके परिवार के सभी सदस्य अब खेती में पूरा साथ देते हैं। अमर सिंह ने बताया कि खेती कोई जुआ नहीं है। यदि विज्ञान और मेहनत को साथ में जोड़ दें तो मिट्टी सोना उगलती है। वह अपने गांव के युवा किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। वह साबित कर चुके हैं कि छोटी जमीन पर भी अच्छी सोच और सही तरीके से खेती करके अच्छा जीवन जिया जा सकता है।