फोटो-11ब्लू कार्न की फसल दिखाती कृषि सखी बबली। संवाद
सीतापुर। कसमंडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सोनारी की कृषि सखी बबली प्राकृतिक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। क्लस्टर सीता रसोई से जुड़ी बबली बीते एक साल से प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं।
कृषि सखी बबली की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह इसके लिए सबसे पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इसके बाद कृषि सखी बनीं। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, कटिया से तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर गो आधारित प्राकृतिक खेती को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। उन्होंने अपने खेत में जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत व दशपर्णी अर्क का नियमित उपयोग शुरू किया। जिससे उनकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ। बबली की खासियत यह है कि वे स्वयं प्राकृतिक खेती अपनाने के साथ-साथ अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव के कई किसान अब रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
ब्लू कॉर्न की खेती से दो लाख रुपये तक हो रहा लाभ
बबली ने अपने खेत में पोषण वाटिका विकसित की है, जिसमें वे मौसमी सब्जियों जैसे लौकी, तोरई, करेला, कद्दू, भिंडी, टमाटर एवं मिर्च की खेती कर रही हैं। इससे उनके परिवार को शुद्ध एवं पोषक आहार मिल रहा है। साथ ही बाजार पर निर्भरता भी कम हुई है। इसके अतिरिक्त उन्होंने गेहूं, धान के साथ ही ब्लू कॉर्न की खेती कर एक नई पहल की है, जो बाजार में पांच सौ रुपये किलो तक बिकता है। इस फसल में दो लाख रुपये का मुनाफा हुआ है।
मिट्टी की सेहत हुई बेहतर
बबली ने बताया कि प्राकृतिक खेती से लागत में कमी आई है और मुनाफा बढ़ा है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता भी बेहतर हुई है। वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। उनका यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और सतत कृषि की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।