शारदा के उफनाने का भी खतरा बढ़ा, लोगों ने शुरू किया विस्थापन
रेउसा/सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। पहाड़ों पर हो रही बारिश से बैराजों का जलस्तर बढ़ रहा है। बैराजों से काफी मात्रा में पानी यहां की नदियों में छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को बैराजों से करीब सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इससे गांजरी इलाके में बाढ़ के खतरे की घंटी बज गई है। हालात यह है कि घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वहीं शारदा नदी के जलस्तर में भी इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। इससे तटीय क्षेत्रों में हड़कंप मचा हुआ है। लोग तेजी से सुरक्षित ठिकानों की तरफ रुख कर रहे हैं।
अभी तक गांजरी क्षेत्र में रेउसा इलाके में बाढ़ की संभावना जताई जा रही थी। क्योंकि घाघरा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। लेकिन अब बैराजों से जो पानी छोड़ा गया है, उससे शारदा नदी के जलस्तर में भी इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
इससे रेउसा समेत तंबौर का इलाका भी बाढ़ की चपेट में आने की संभावना जताई जा रही है। इससे तटीय क्षेत्रों में हड़कंप मचा हुआ है। खासकर रेउसा क्षेत्र के दुर्गा पुरवा, लोधपुरवा, कोनी, मरेली, जैतहिया, कटैला पुरवा समेत करीब 35 गांवों के बाशिंदे बाढ़ आने की संभावना को लेकर सशंकित हैं।
घाघरा में उठती लहरों को देखकर बहुत से परिवारों ने तो सुरक्षित ठिकानों की तरफ रुख कर लिया है। ये परिवार अब बहराइच मार्ग की तरफ बढ़ रहे हैं। जिसको जहां भी जगह मिल रही है, वह अपनी झोपड़ी डाल रहा है। नदी का पानी नालों के रास्ते तेजी से आबादी की तरफ बढ़ रहा है।
करीब 35 गांवों के आसपास खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे फसलों को नुकसान हो रहा है। आने वाले समय में भी तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। शुक्रवार को घाघरा व शारदा बैराजों से करीब 226076 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इससे आने वाले दिनों में जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि बैराजों का पानी शनिवार तक रेउसा में पहुंच जाएगा। जिससे बाढ़ आना लगभग तय है। उधर पहाड़ों से भी राहत भरी खबर नहीं आ रही है।
वहां पर हुई जबरदस्त बारिश के चलते बनबसा बैराज पर जलस्तर बढ़ रहा है। शुक्रवार को बनबसा बैराज से 81940 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी जलस्तर में और इजाफा करेगा।
सात परिवार पहुंचे जंगल टपरी
घाघरा के बीच टापू पचीसा पर भी घाघरा का कहर बरप रहा है। नदी का रौद्र रूप देखकर टापू के बाशिंदे सहम गए हैं। यही वजह है कि बाढ़ आने से पहले टापू के बाशिंदों ने टापू छोड़कर सुरक्षित ठिकानों का रुख कर रहे हैं। शुक्रवार को पचीसा टापू पर बसे देशरात, सुनील, लालाराम, हनुमान, सुरेश, ब्रम्हा, भगौती आदि अलग अलग नावों पर सवार होकर टापू से निकल लिए।
इस दौरान नावों पर उनकी गृहस्थी का सामान भी था। सातों परिवार तट पर उतरने के बाद जंगल टपरी पर पहुंचे। यहां पर इन परिवारों ने अपना आशियाना बनाना शुरू कर दिया है। नदी पार आने वाले परिवारों ने बताया कि बहुत जल्द ही टापू पर बसे अन्य परिवार भी टापू छोड़कर किनारे पर आ जाएंगे।
कोनी के निकट कटान
घाघरा शुक्रवार को कोनी के निकट कटान कर रही थी। रात से लेकर शुक्रवार शाम तक नदी ने खेती की करीब 30 बीघा जमीन को निकल लिया था। वहीं कटान जारी था, इससे संभावना जताई जा रही है, कि नदी अभी और कहर बरपाएगी।
स्टड तोड़ रहे दम
दुर्गापुरवा व तटीय क्षेत्र की आबादी को घाघरा नदी के कहर से बचाने के लिए स्टड का काम चल रहा है। लेकिन यह स्टड बेहद घटिया किस्म का बनाया गया है। हालत यह है कि शुरुआती दौर में ही स्टड में लगी बोरियां एक दूसरे का साथ छोड़ रहीं हैं। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि पानी का दबाव अगर और बढ़ा, तब इस स्टड का पता ही नहीं चलेगा। जिससे समस्या जस की तस ही बनी रहेगी।
ईंधन की चिंता
बाढ़ आने से पहले जहां तटीय क्षेत्र के बाशिंदे राशन को एकत्र कर रहे हैं। वे लंबे समय तक के लिए जहां राशन जुटा रहे हैं। वहीं ईंधन को भी बटोरना शुरू कर दिया है। बाढ़ के वक्त चूल्हे में जलाने के लिए सूखी लकड़ी की समस्या रहती है। ऐसे में तटीय क्षेत्र के बाशिंदे अभी से ही लकड़ियों को समेट रहे हैं। जिनको एकत्र करके ऊंचे स्थान पर जमा कर रहे हैं।
रखी जा रही नजर
घाघरा के जलस्तर में इजाफा हो रहा है, इस पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन की टीमें पूरी तरह से तैयार हैं, जरूरत पड़ते ही टीमें मदद को पहुुंच जाएंगी।
-शशिभूषण राय, एसडीएम