सीतापुर। पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में हर साल लाखों पौधे रोपित किए जा रहे हैं। यह काम जिस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है, उसकी पूर्ति नहीं हो रही है। इसका प्रमुख कारण अधिकांश रोपित पौधों का जीवित न रहना है। विकास विभाग की ओर से बीते साल लगाए गए पौधों में से 70 फीसदी जीवित नहीं है।
पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए प्रति वर्ष विभागवार पौधरोपण का लक्ष्य तय किया जाता है। इसी के अनुरूप इसे पूर्ण किया जाता है। जिससे जिले की पर्यावरणीय सेहत सुधरे, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। जिले में 19 विकासखंड हैं जबकि 1599 ग्राम पंचायतें हैं। विकास विभाग की ओर से बीते साल पौधरोपण का कार्य कराया गया था। इसके लिए ब्लॉकवार लक्ष्य निर्धारित किया गया था। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 26 लाख 98 हजार 580 पौधे लगाए गए थे। इनमें आठ लाख 11 हजार 146 पौधे ही जीवित हैं। जीवितता का प्रतिशत 30.06 है।
पर्यावरण प्रेमी ज्ञान प्रकाश सिंह ‘प्रतीक’ बताते हैं कि करीब 70 फीसदी रोपित पौधे जीवित नहीं है। जब पौधे जीवित ही नहीं रहेंगे तो दिन प्रतिदिन खराब हो रही पर्यावरण की सेहत में सुधार कैसे होगा। जिले के संबधित विभागों की मिलीभगत से निरंतर हरियाली पर आरा चल रहा है। आम, नीम सहित अन्य हरे-भरे पेड़ों काटा जा रहा है। पौधरोपण का कार्य कागजों पर हो रहा है। लक्ष्य के सापेक्ष पौधों की उपलब्धता न होने पर भी सभी पौधे कैसे लग जाते हैं, इस ओर जिम्मेदार ध्यान ही नहीं दे रहे हैं।
ब्लॉक हरगांव की स्थिति अधिक खराब
साल 2021-22 में विकासखंड हरगांव में एक लाख 38 हजार 294 पौधे लगाए गए थे। इसमें मात्र 5130 पौधे ही जीवित हैं। इसी प्रकार महोली ब्लॉक में एक लाख 26 हजार 736 रोपित पौधों में से 8148 पौधे जीवित हैं। महमूदाबाद में 9.85 फीसदी पौधे जीवित हैं। गांजरी क्षेत्र के ब्लॉक रेउसा में भी स्थिति खराब है, यहां रोपित पौधों में करीब 16 फीसदी पौधे ही जीवित हैं।
देखरेख न होने से अधिकतर पौधे सूखे
जिले में 2017-18 से 2020-21 तक रोपे गए पौधों के जीवित रहने की स्थिति भी अधिक खराब हैं। ज्यादातर पौधे सूख गए हैं। साल 2017-18 में लगाए गए एक लाख 61 हजार पौधों में से 36,848 पौधे ही जीवित हैं। 2018-19 में सात लाख 82 हजार 694 पौधों में से एक लाख 40 हजार 848 पौधे, वर्ष 2019-20 में लगाए गए 27 लाख 21 हजार सात सौ पौधों में से छह लाख 57 हजार 434 पौधे जीवित हैं। जबकि वर्ष 2020-21 में 19 ब्लॉक क्षेत्रों में रोपे गए 22 लाख दो हजार नौ सौ पौधों में से चार लाख 84 हजार 122 पौधे जीवित हैं।