सीतापुर। जनपद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर तैनात लगभग 1500 डॉक्टर, एएनएम व पैरामेडिकल स्टॉफ को पिछले दो महीनों से मानदेय नहीं मिला है।
इस देरी के कारण कर्मियों को अपने दैनिक खर्चों और वित्तीय देनदारियों को पूरा करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। वेतन न मिलने का सीधा असर कर्मियों के परिवारों पर पड़ा है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष पीयूष वाजपेयी ने बताया कि मार्च और अप्रैल का मानदेय बकाया होने के कारण कई कर्मचारी अपने बच्चों के स्कूल की फीस समय पर जमा नहीं कर पा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, अधिकांश कर्मियों ने निजी वाहन या घरेलू सामानों के लिए लोन ले रखा है, जिनकी ईएमआई न चुका पाने के कारण उन पर बैंक का ब्याज और पेनल्टी बढ़ती जा रही है।
उधारी के भरोसे हो रहा गुजारा
संविदा पर तैनात ये चिकित्सक, एएनएम और स्टॉफ नर्स पूरी तरह से अपने मासिक मानदेय पर निर्भर हैं। कर्मियों का कहना है कि एक महीने तो किसी तरह जमा पूंजी से काम चलाया, लेकिन अब दूसरा महीना बीतने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है। कई स्वास्थ्य कर्मी अब स्थानीय दुकानदारों से उधारी लेकर घर का चूल्हा जला रहे हैं।
बजट की कमी बनी रोड़ा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि मानदेय के भुगतान में आ रही देरी का मुख्य कारण बजट का अभाव है। प्रशासन ने इस समस्या से शासन को अवगत करा दिया है। सीएमओ ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही शासन से बजट आवंटित होगा, प्राथमिकता के आधार पर सभी स्वास्थ्य कर्मियों का बकाया मानदेय उनके खातों में भेज दिया जाएगा। फिलहाल, कर्मचारी जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।