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सरकारी कॉलेजों में खाली रह गई सीटें

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सरकारी कॉलेजों में खाली रह गईं सीटें
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स्नातक व परास्नातक में दाखिले में इस बार नहीं हुई परेशानी
31 जुलाई को पूरी हो गई एडमिशन प्रक्रिया

सीतापुर। स्नातक व परास्नातक में इस बार राजकीय व अनुदानित कॉलेजों में सीटें रिक्त रह गई हैं। इन सीटों पर दाखिला लेने के लिए विद्यार्थी ही नहीं पहुंचे हैं। खास बात यह है कि यह महाविद्यालय विद्यार्थियों की पहली पसंद होते हैं, लेकिन इस बार इनका मोहभंग हो गया। इसके पीछे जानकार स्ववित्त पोषित महाविद्यालय जनपद में अधिक होना बता रहे हैं।
जनपद में पंडित दीनदयाल उपाध्याय महाविद्यालय खैराबाद व फखरुद्दीन अली अहमद स्नातकोत्तर महाविद्यालय महमूदाबाद राजकीय है। इसी प्रकार अनुदानित महाविद्यालयों में आरएमपी डिग्री कॉलेज, हिंदू कन्या महाविद्यालय व गांजी पीजी कॉलेज सिधौली शामिल है। इस बार इंटर में 30 हजार 427 विद्यार्थी पास हुए थे। इन विद्यार्थियों की पहली पसंद यह महाविद्यालय होते हैं। ऐसे में यहां पर सीटों के लिहाज से मारामारी मचने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन हालात इसके उल्टा निकले। 31 जुलाई को एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो गई। अब भी यहां पर कई सीटें खाली रह गई हैं। जबकि जनपद में 75 वित्त विहीन महाविद्यालय हैं। इन महाविद्यालयों में 35 हजार के करीब बीए, बीएससी, बीकॉम की सीटें है। महाविद्यालय के प्राचार्यों का कहना है कि जनपद में वित्त पोषित महाविद्यालय की कोई कमी नहीं है। अब तो यह महाविद्यालय अपना कोटा पूरा करने के लिए विद्यार्थियों को तलाश रहे हैं। इसी वजह से सरकारी कॉलेजों में सीटें बच गई हैं।
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यह हैं महाविद्यालयों के हालात
पंडित दीनदयाल उपाध्याय महाविद्यालय खैराबाद में बीए की 360 सीटें थीं, जिसमें 317 भर गई हैं। जबकि 43 सीटें रिक्त बची हैं। इसी प्रकार फखरुद्दीन अली अहमद स्नातकोत्तर महाविद्यालय महमूदाबाद में बीए व एमए की सीटें भर गई हैं। लेकिन कॉमर्स की 120 में से केवल 75 ही भरी हैं। जबकि 45 सीटें खाली पड़ी हैं। इसी प्रकार आरएमपी डिग्री कॉलेज में सभी सीटें फुल हो गई हैं। हिंदू कन्या महाविद्यालय में बीए की 1020 में 140 सीटें रिक्त हैं। गांजी पीजी कॉलेज सिधौली में एमए की 240 में से 200 भरी हैं, जबकि 40 खाली चल रही हैं।
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कोट
रिजल्ट की वजह से आई कमी
इस बार पिछले साल की तुलना मेें इंटरमीडिएट का रिजल्ट काफी कम आया है। साथ ही फाइनेंस कॉलेजों की जनपद में कोई कमी नहीं है। इस बार इन कॉलेज ने फीस कम करके विद्यार्थियों का एडमिशन ले लिया है। इसी वजह से सरकारी व अनुदानित कॉलेजों की तरफ विद्यार्थियों का मोह कम हुआ है।
- डॉ. एसपी शाक्य, प्राचार्य आरएमपी डिग्री कॉलेज
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