बीती मई में ही 55 लोगों के खिलाफ दर्ज हो चुके हैं केस
सीतापुर। पावर कॉर्पोरेशन का अपना अलग थाना खुलने से बिजली चोरी पर काफी हद तक अंकुश लग सकेगा। इसकी तस्दीक आंकड़े कर रहे हैं। अकेले मई माह में ही पावर कॉर्पोरेशन ने 1146 उपभोक्ताओं के विद्युत कनेक्शनों की जांच की। इसमें 142 लोग बिजली चोरी करते हुए पकड़े गए। 55 लोगों पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
कॉर्पोरेशन का कहना है कि इस दौरान कई ऐसे मामले आए हैं जहां पर पुलिस बल न होने से चेकिंग में बाधा पहुंची। जब अपने विभाग की पुलिस होगी तो यह अभियान और तेजी से आगे बढ़ेगा। साथ ही एफआईआर का भी जल्द निपटारा होगा। इससे एक तो राजस्व की बढ़ोतरी होगी। वहीं बिजली चोरी और लाइन लॉस पर भी काफी अंकुश लग सकेगा।
प्रदेश सरकार ने हर जिले में पावर कॉर्पोरेशन का पुलिस थाना खोलने की मंजूरी दे दी है। इस थाने में इंस्पेक्टर, एसआई व कांस्टेबल तैनात किए जाएंगे। इन थाने का सिर्फ काम बिजली चोरी रोकना होगा। अभी तक पावर कॉर्पोरेशन बिजली चोरों के खिलाफ अभियान चलाता है तो इस दौरान पुलिस बल मौजूद नहीं रहता है।
इससे कई बार उपभोक्ताओं व अधिकारियों के बीच नोकझोंक हो जाती है। इससे चेकिंग प्रभावित होती है। अब जब कॉर्पोरेशन की अपनी पुलिस होगी तो कोई विरोध करने की जहमत भी नहीं उठा सकता है। इससे चेकिंग में और तेजी आएगी। पावर कॉर्पोरेशन के मुताबिक, एक से 31 मई तक जिले में बिजली चेकिंग अभियान चलाया गया।
इस दौरान 1146 उपभोक्ताओं के विद्युत कनेक्शन चेक किए गए। इसमें 11 उपभोक्ता कॉमर्शियल का कनेक्शन उपयोग करते हुए पकड़े गए। 48 उपभोक्ताओं का उपयोग से कम लोड मिला। 64 लोग मीटर में संटिग व केबिल काटकर चोरी करते हुए पकड़े गए।
19 लोगों के बकाए के चलते कनेक्शन काट दिए गए थे। लेकिन इन्होंने बकाया बिल जमा किए ही कनेक्शन जोड़ लिए। जिस पर 55 के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। साथ ही 22 लाख रुपये का समन शुल्क भी वसूला गया है। कॉर्पोरेशन का कहना है कि अगर अपना फोर्स हो जाए तो चेकिंग में बहुत तेजी आएगी।
वहीं एक बार एफआईआर दर्ज होने के बाद इसकी विवेचना में काफी समय लगता है। इससे मामला लंबित पड़ा रहता है। हालांकि इस समय पुलिस के पास बिजली के कितने मामले लंबित पड़े हैं इसकी जानकारी कॉर्पोरेशन के पास मौजूद नहीं है।
बिजली चोरी का किन धाराओं में दर्ज होता है केस
पावर कॉर्पोरेशन के मुताबिक बिजली चोरी के दो धाराओं में केस दर्ज कराए जाते हैं। धारा 135 उन बिजली चोरों पर लगाई जाती है जो मीटर में छेड़छाड़ व कटिया डालकर बिजली उपयोग करते हैं। जांच में मामला सही पाए जाने पर समन शुल्क वसूला जाता है।
अगर यह शुल्क जमा नहीं करते हैं तो जेल जाना पड़ता है। इसी प्रकार 138 बी के तहत उन उपभोक्ताओं पर केस दर्ज कराया जाता है। जिन लोगों द्वारा बकाए को लेकर एक बार कनेक्शन काट दिए जाने के बाद बिना पैसा जमा किए ही दोबारा जोड़ लेते हैं। पुलिस इनसे पूरा पैसा वसूल करती है।
सप्ताह में दो दिन चलता अभियान
पावर कॉर्पोरेशन द्वारा इस समय सप्ताह में दो दिन अभियान चलाया जा रहा है। गुरुवार व शुक्रवार को पूरे जिले में कई टीमें बनाकर अभियान चलाया जाता है। इस अभियान की अगुवाई खुद ही अधीक्षण अभियंता एनपी सिंह करते हैं। साथ ही टीम में अधिशाषी अभियंता, एसडीओ व जेई शामिल होते हैं।
विभाग व विजिलेंस पोर्टल पर लोड करते हैं विवरण
अधिकारियों का कहना है कि पावर कॉर्पोरेशन व विजिलेंस मिलकर बिजली चोरी पकड़ते है। इसके लिए विभाग का अपना एक पोर्टल बना हुआ है। इस पोर्टल पर विभाग व विजिलेंस बिजली चोरी की पूरी डिटेल भरते हैं। इसमें बताना होता है कि कितने कनेक्शन चेक किए गए।
कितने में चोरी पकड़ी गई। कितनी एफआईआर व कितना समन शुल्क वसूला जाएगा। इसकी सीधी मॉनीटरिंग शासन स्तर से होती है। इससे अब कोई भी बिजली चोरी का मामला विभाग से छिपाया नहीं जा सकता है।
नहीं होने देंगे बिजली चोरी
पावर कॉर्पोरेशन का अलग थाना खुलने से बिजली चोरी पर काफी हद तक लगाम लगेगी। इससे जांच के दौरान आने वाली समस्याएं दूर होंगी। मई से लगातार पूरे जिले में अभियान चल रहा है। कहीं पर भी बिजली चोरी होने नहीं दी जाएगी। लगातार टीमें भ्रमण कर रही हैं। मैं खुद जाकर चेकिंग करता हूं।
-एनपी सिंह, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन