सीतापुर। जिले के 11 राजकीय हाईस्कूल कॉलेजों के भवन जल्द बनकर तैयार हो जाएंगे। इन भवनों में विद्यार्थी इसी सत्र से वहां पर पढ़ाई शुुरू कर देंगे। 15 अगस्त तक कॉलेज माध्यमिक शिक्षा विभाग को हैंडओवर हो जाएंगे। एक भवन पर 69.51 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। डीआईओएस ने पांच कॉलेजों का मुआयना करके यहां पर चले निर्माण कार्य की हकीकत देखी।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिले में 11 राजकीय हाईस्कूल कॉलेज को मंजूरी मिली थी। इस पर जिला प्रशासन ने विकासखंडवार जमीन चिन्हित करते हुए शासन को प्रस्ताव भेज दिया था। उसके बाद बजट आने का सिलसिला शुरू हो गया। एक स्कूल के भवन पर करीब 69.51 लाख रुपये खर्च किए जाने है। एक कॉलेज का भवन एक मंजिला बनेगा।
निर्माण कार्य के लिए पहली किश्त 2016 को 20 लाख रुपये की दी गई थी। जब इतनी रकम से काम पूर्ण हो गया तो उसके बाद दूसरी किश्त 2018 को 9.50 लाख दिए थे। इससे भी निर्माण पूरा होने पर अगली तीसरी किश्त 2018 को 10.50 लाख रुपये की दी गई थी। उसके बाद चौथी किश्त 12 लाख 30 नवंबर 2019 व अंतिम किश्त 10.55 लाख चार मई 2020 को दी गई है।
10 फीसद धनराशि हैंडओवर हो जाने के बाद दी जाएगी। इस रकम से भवनों की स्लैप पड़ चुकी है। प्लास्टर व फिनिशिंग का काम जोरों से चल रहा है। जब भवन बनने में देरी हुई तो शासन ने इन्हें निकट के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के प्रांगण में शुरू करा दिया था। इससे यह स्कूल तो संचालित हो रहे है। लेकिन भवन आधे अधूरे पड़े हुए हैं।
अब बजट रिलीज होने के बाद जल्द निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा। 15 अगस्त तक यह सभी कॉलेजों के भवन हैंडओवर हो जाएंगे। उसके बाद यहां पर विद्यार्थी पढ़ते हुए दिखाई देंगे। जबकि इन भवनों में 2017 से पढ़ाई शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया था।
यहां पर है यह कॉलेज
राजकीय हाईस्कूल विशुनपुर एलिया, राजकीय हाईस्कूल सलारपुर बेहटा, राजकीय हाईस्कूल सिरकिडा बेहटा, राजकीय हाईस्कूल जुवापुरवा बेहटा, राजकीय हाईस्कूल कुचलई गोंदलामऊ, राजकीय हाईस्कूल लालपुर महमूदाबाद, राजकीय हाईस्कूल पचदेवरा सकरन, राजकीय हाईस्कूल सरोरा सिधौली, राजकीय हाईस्कूल वजीरपुर हरगांव, राजकीय हाईस्कूल कबरा पहला व राजकीय हाईस्कूल चौसा रेउसा है।
69.51 लाख मिलने में लग गए चार साल
प्रत्येक भवन को एक साल में बनने का लक्ष्य तय किया गया था। भवन निर्माण की पहली किश्त 26 दिसंबर 2016 को मिली थी। लेकिन उसके बाद बजट मिलने में इतनी अड़चनें आई, कि यह भवन चार साल बाद बनकर तैयार हो सके है। अगर समय से बजट मिलता रहता तो यह बहुत पहले ही तैयार हो गए होते। इन कॉलेजों में पढ़ने का सपना देख रहे विद्यार्थियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। इस इंतजार में तो तमाम विद्यार्थी पढ़कर भी निकल गए।
तेजी से चल रहा है काम
कॉलेजों के भवन तेजी से बन रहे है। कॉलेज जाकर वहां पर हो रहे निर्माण कार्य को बारीकी से परखा गया है। उम्मीद है कि 15 अगस्त तक यह हैंडओवर हो जाएंगे।
- नरेंद्र शर्मा, डीआईओएस