सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में बुधवार को नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को नए विचारों को उपयोगी उत्पादों और उद्यमों में बदलने के लिए प्रेरित किया गया। इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासा, रचनात्मकता और नए विचारों को व्यावहारिक स्वरूप देने का प्रयास करना चाहिए। संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराएं, ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
उन्होंने कहा कि किसी विचार का महत्व उसके छोटा या बड़ा होने में नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता में है। स्टार्टअप नए विचारों को उत्पादों, सेवाओं और उद्यमों में बदलने का माध्यम है। इससे रोजगार सृजन के साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलती है।
अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक के विस्तार से रोजगार के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में पारंपरिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करना जरूरी है। उन्होंने एआई, सेमीकंडक्टर और अन्य उभरते क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शोध, पेटेंट और नवाचार को बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है। कई उपयोगी विचार और आविष्कार उचित सहयोग के अभाव में उद्योगों तक नहीं पहुंच पाते। विश्वविद्यालय में प्रो. अखिलेश दीक्षित के नेतृत्व में संचालित सिद्धार्थ इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के माध्यम से विद्यार्थी अपने नवाचारी विचारों और व्यावसायिक योजनाओं को विकसित करने के लिए मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
ऑनलाइन माध्यम से जुड़े लखनऊ की राफ्ट एंड रिवर लिमिटेड के प्रमुख निपेंद्र भट्ट ने ‘नर्चरिंग बिजनेस आइडिया’ विषय पर विचार रखे। ि