थोड़ी सी मात्रा से भी बनेगा वेस्ट डीकंपोजर का घोल
चार हजार शीशी से 1.75 लाख हेक्टेयर खेत की पराली होगी निस्तारित
दही के जोरन की तरह है वेस्ट डीकंपोजर, थोड़ी मात्रा से बना सकेंगे दोबारा
एक बार खरीदने के बाद कई बार प्रयोग कर सकेंगे किसान, होगी बचत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पराली निस्तारण के लिए किसान वेस्ट डीकंपोजर की थोड़ी मात्रा से ही बार-बार घोल तैयार कर सकते हैं। इस तरह किसानों में वितरित की जा रही चार हजार शीशी वेस्ट डीकंपोजर से जिले में 1.75 लाख हेक्टेयर की धान की पराली का कुछ ही समय में निस्तारण हो जाएगा।
वैसे तो एक शीशी वेस्ट डीकंपोजर से एक एकड़ खेत की पराली सड़ाकर खाद बनाने के लिए घोल तैयार होगा, लेकिन उसमें बचे हुए घोल की कुछ मात्रा से ही दोबारा घोल तैयार कर सकते हैं। इस तरह पराली निस्तारण के लिए परेशान किसानों के लिए वेस्ट डीकंपोजर की थोड़ी मात्रा ही पर्याप्त होगी। वेस्ट डीकंपोजर के घोल का प्रयोग किसान दही के ‘जोरन’ की तरह कर सकते हैं, जो गुड़ और पानी के घोल में डालकर दोबारा तैयार किया सकता है। 200 लीटर पानी और दो किग्रा गुड़ के घोल में वेस्ट डीकंपोजर की 20 एमएल की एक शीशी मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। घोल को लकड़ी के डंडे की सहायता से तीन मिनट तक हिलाएं। यह घोल सात से आठ दिन में तैयार हो जाता है, जिसे एक एकड़ खेत की पराली में छिड़काव करने के कुछ ही दिन बाद पराली को सड़ाकर खाद में बदल देगी।
कुछ मात्रा से दोबारा तैयार हो जाएगा घोल
जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह कहते है कि वेस्ट डीकंपोजर देशी गाय के गोबर से निकाले गए फंगल से तैयार एक जैविक घोल है, जो दही के जोरन की तरह है। इसके घोल की बची हुई थोड़ी मात्रा का प्रयोग कर दोबारा बड़ी मात्रा में घोल तैयार किया जा सकता है। इससे किसान को दुकान से बार-बार वेस्ट डीकंपोजर की खरीदारी नहीं करनी पड़ेगी। एक शीशी से ही वह अपने पूरे खेत की पराली को सड़ाकर खाद बना सकेंगे। किसानों से अनुरोध है कि वे वेस्ट डीकंपोजर के घोल के अपने साथी किसानों में बांट दें, जिससे वे भी घोल तैयार कर सकें।