सिद्धार्थनगर। शनिवार की रात मोहर्रम की छठवीं पर हल्लौर के हजरत अब्बास की दरगाह में मजलिस के आयोजन के बाद रात में मासूम अकीदतमंदों ने हजरत कासिम का ताबूत और अली असगर अलैहिस्सलाम का झूला जुलूस निकाला। देर रात तक गांव में घूमने के बाद वापस हजरत अब्बास की दरगाह में आकर समाप्त हुआ। रविवार की सुबह एक दूसरे के विपरीत खड़ी रहने वाली अंजुमन फरोग मातम व गुलदस्ता मातम ने सेठबाबा और बड़े इमामबाड़े पर आयोजित मजलिस के बाद अलम का जुलूस निकाला।
शनिवार को हजरत अब्बास की दरगाह पर आयोजित मजलिस खिताब करते हुए जाकिरे अहलेबैत अजीम हैदर ने कहा कि हजरत कासिम से उनके चाचा ने जब पूछा कि मौत का मजा कैसा होता है, तो हजरत कासिम ने मुस्कुराते हुए जबाव दिया कि शहद से भी मीठा होता है। हजरत कासिम ने कर्बला के मैदान ए जंग में अपने दुश्मनों को धूल चटा दी थी, लेकिन यजीदी फौज ने पीछे से वार किया, जिससे हजरत कासिम जमीन पर गिर पड़े। यजीदी फौज ने घोड़ों की टापों के नीचे रौंदकर बेरहमी से शहीद कर दिया।
इतना सुनते ही मजलिस में मौजूद अकीदतमंदों की आंखों से आंसू बहने लगे। मजलिस के पहले सोजख्वानी अंबर मेंहदी व उनके हमनवां ने किया। वहीं मजलिस के बाद नौहा ख्वानी नफीस सैय्यद ने किया। रविवार की सुबह भी अंजुमन फरोग मातम ने सेठबाबा के इमामबाड़े पर मजलिस की, जिसे खिताब मौलाना जमाल हैदर ने किया। इसके अलावा अंजुमन गुलदस्ता मातम ने बड़े इमामबाड़े पर मजलिस करवाया, जहां मौलाना जमाल हैदर ने कर्बला में हजरत कासिम के शहादत की दास्तां सुनाई।
मजलिस के बाद दोनों अंजुमनों के अकीदतमंदों ने अलम लेकर गांव में जुलूस निकाला। जुलूस पूरे गांव में घूमते हुए डुमरियागंज-बस्ती मुख्य मार्ग पर पहुंचा। नौहा मातम के बाद जुलूस वापस अपने-अपने ठिकानों पर शाम करीब पांच बजे पहुंचकर तमाम हो गई। इस दौरान हल्लौर गांव में दिनभर हाय हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। इस दौरान तसबीब हसन, गुलाम हुसैन, डा. नायाब हैदर, जमाल, मंजर अब्बास, काजिम मेंहदी, हाशिम रिजवी, असकरी शमीम रिजवी, मोहम्मद इमरान, अनम, अमन, मोहम्मद हैदर, जफरुल हुसैन, साजिद अब्बास, राशिद कप्तान, राहिब रिजवी, कायनात रिजवी, मेहताब हैदर आदि मौजूद रहे।