संवाद न्यूज एजेंसी
खुनुवां। भारत-नेपाल सीमा स्थित खुनुवां बॉर्डर के नो मेंस लैंड में सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से दोनों देशों के नागरिकों का आवागमन मुश्किल हो गया है।
जलभराव के कारण दोपहिया, चारपहिया और मालवाहक वाहनों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नो मेंस लैंड में पानी से लबालब भरे गड्ढों के बीच से वाहन चालक जोखिम उठाकर गुजरते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नो मेंस लैंड में करीब दो से ढाई फुट गहरे गड्ढों में पानी भरा रहने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। विशेष रूप से भारी मालवाहक वाहनों के पलटने की आशंका बनी रहती है।
वहीं, बरसात के मौसम में दोपहिया वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पा रहा है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया है। पैदल यात्रियों को भी जलभराव और कीचड़ के बीच होकर आवागमन करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीमा के इस महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाल स्थिति के बावजूद भारत और नेपाल, दोनों देशों की संबंधित सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासनिक अधिकारी समस्या के समाधान के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। लंबे समय से यह समस्या जस की तस बनी हुई है।
नेपाल के कपिलवस्तु जिले के पूर्व जिला सभापति (नेपाली कांग्रेस) राजेश आचार्य, पूर्व जिला समन्वय समिति के अनूप पांडेय और राष्ट्रीय सह-अध्यक्ष कालीपद शर्मा ने बताया कि सीमा स्तंभ संख्या 556 के समीप नो मेंस लैंड में बने गहरे गड्ढों और उनमें भरे पानी के कारण दोनों देशों के लोगों को प्रतिदिन भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि नेपाल सरकार के साथ-साथ भारतीय सीमा पर तैनात संबंधित विभाग भी इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे राहगीरों के लिए समस्या बढ़ गई है।
उधर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन, शाखा खुनुवां के अध्यक्ष रविंद्र कुमार गुप्ता, महामंत्री सचमुच त्रिपाठी, राजीव श्रीवास्तव, कृष्ण कुमार मिश्र, संतोष कुमार गुप्ता सहित अन्य लोगों ने भारत और नेपाल के शासन-प्रशासन से नो मेंस लैंड की सड़क की तत्काल मरम्मत कराकर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।