संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए 16 वार रूम बनाए गए हैं, लेकिन इसी दौरान बीते 15 दिनों में लापरवाही से दो प्रसूताओं की जान चली गई।
अत्यधिक जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के साथ ही अन्य गर्भवती महिलाओं की जान बचाना वार रूम की चुनौती बन गई है। ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टरों व सुविधाओं के अभाव में भी महिलाओं की जान जा रही है।
जिलाधिकारी डाॅ. राजा गणपति आर. के निर्देश पर सीएमओ कार्यालय, मेडिकल कॉलेज, सभी सीएचसी एवं ब्लॉक स्तरीय पीएचसी में वार रूम बनाए गए हैं। वार रूम से अत्यधिक जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच एवं संस्थागत प्रसव की जानकारी लेने के साथ सहयोग किया जा रहा है, जबकि अन्य प्रसुताओं के प्रसव के दौरान समस्याओं का समाधान किया जा रहा है, लेकिन इतने प्रयासों के दौरान ही 15 दिन में दो मामलों में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। इन मामलों की जांच भी की जा रही है, लेकिन ऐसी मौतों को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को पसीना आ रहा है।