फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राप्ती की लहरों के आगे भारी पड़ा ग्रामीणों का पसीना

विज्ञापन
विज्ञापन
राप्ती की लहरों के आगे भारी पड़ा ग्रामीणों का पसीना
विज्ञापन

बांसी। बारिश के दौरान मंगलवार को जमींदारी बांध के किनारे राप्ती की तेज लहरों के आगे ग्रामीणों का बहाया पसीना भारी पड़ा। गरगजवा गांव के लोगों ने बांध में रिसाव देखा तो उन्होंने सिंचाई विभाग का इंतजार किए बिना ही खांची, कुदाल उठा ली और बांध पर बांस के सहारे डाले गए पॉलीथिन के नीचे बोरियों में मिट्टी भरकर रिसाव के पास डाला। उससे बांध कटने से बच गया।
राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बांसी क्षेत्र में जमींदारी बांध में रिसाव शुरू हो गया है। इससे बांध टूटने की आशंका से सहमे ग्रामीण कई दिनों से पूरी रात जाग कर बांध की रखवाली कर रहे हैं। मंगलवार को बांध की कटान रोकने की जंग में महिलाओं ने भी पूरी जिम्मेदारी निभाई। फिलहाल रिसाव रुक गया है, मगर गांव के लोग अब भी बांध की रखवाली कर रहे हैं। सिंचाई विभाग के अभियंताओं की लापरवाही से इस बांध के निकट बसे लोगों में काफी नाराजगी है। 10 दिन से राप्ती नदी का जल स्तर बढ़ने पर इस बांध में कई जगह हो रहे रिसाव की सूचना विभाग को देने के बाद कुछ स्थलों पर रिसाव को रोकने का काम किया गया, परंतु बांध के रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
विज्ञापन

इसका परिणाम था कि गरगजवा के पास कटान शुरू ही हुई थी कि गांववालों की जागरूकता तथा कड़ी मेहनत से कटान को रोक लिया। सभासद के प्रतिनिधि नीलेश निषाद ने बताया कि कटान होती देख गांव के लोगों ने तुरंत पटरा लगा और बोरे मिट्टी भरकर कटान रोक दी। सिंचाई विभाग का कोई अभियंता इस जर्जर बांध का जायजा लेने नहीं आया। यही हाल इस बांध पर कटहा गांव के पास है। यहां भी दो स्थलों पर बांध में कटान शुरू हो गई है। इन स्थलों पर मंगलवार को कटान शुरू हो गई है, लेकिन विभाग की ओर से कटान को रोके जाने का कोई जतन नहीं किया जा रहा है। इससे बांध टूटने के डर से सहमे ग्रामीणों में विभाग लोगों के प्रति नाराजगी है।
विज्ञापन

सुरक्षित ठौर की तलाश में ग्रामीण
बांसी। लगातार राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से गरगजवा व कटहा गांव में काफी पानी भर गया है। गांव के सभी रास्तों में भी पानी भरा हुआ है। ऐसे में दोनो गांव के लोगों ने अपने को सुरक्षित करने के लिए मंगलवार की सुबह से डुमरियागंज बांसी बांध को अपना नया ठौर बनाना शुरू कर दिया है। बांध पर ग्रामीणों बास बल्ली गाड़ उस पर पन्नी लगाकर अपना और अपने पशुओं को बारिश से बचाने का जतन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर ऐसे बढ़ता रहा और ऊपर से बरसात होती रही तो कभी भी स्थित भयावह हो सकती है। इस लिए अपने और पशुओं को सुरक्षित करने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें