भारतभारी। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बसडिलिया गांव में स्थित आस्ताना पर शनिवार की रात शहीद-ए-मिल्लत कॉन्फ्रेंस और उर्स का आयोजन किया गया। इसमें उलेमा और वक्ताओं ने दीन और दुनिया में कामयाबी पर रोशनी डाली। उर्स में अकीदतमंदों ने चादर चढ़ाकर दुआ भी मांगी।
शनिवार की रात आयोजित शहीदे आजम कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में गुलाम रसूल बाल्यावी ने कहा कि इंसान अपनी बुराइयों को खत्म करें और नेकी के रास्ते को अपनाए। आज शिक्षा के मामले में मुसलमान काफी पीछे हैं उन्हें दीनी और दुनियावी दोनों शिक्षा पर जोर देना होगा। तभी एक सफल जीवन में कामयाबी मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई की सबसे पहली सीढ़ी मां-बाप होते हैं। अगर बचपन में मां-बाप का प्यार और तालीम-ओ-तरबियत मिले तो वह बच्चे गलत कामों की तरफ नहीं जा पाते हैं। जब मां-बाप नेक होंगे तो बच्चे भी नेक होंगे। उन्होंने कहा कि दहेज लेना और देना दोनों गुनाह की श्रेणी में आता है।