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Siddharthnagar News: अनुदान दिलाने का छलावा कोटेदार ने बना दिया कर्जदार

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कलेक्ट्रेट पर डीएम को ज्ञापन देने जाती पीड़ित महिलाएं। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। सदर थाना क्षेत्र के बर्डपुर नंबर-12 पकडिहवा में निजी बैंक कर्मियों ने 50 से अधिक महिलाओं को लोन के नाम पर लाखों का कर्जदार बना दिया है। जब बैंक वालों ने कर्ज मांगना शुरू किया तो उन्हें यह जानकारी हुई और भागदौड़ शुरू किया।
महिलाओं ने एक कोटेदार पर अनुदान का झांसा देकर पांच हजार रुपये ले लेने और लोन कराने का आरोप लगाया है। 50 में 17 महिलाएं बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट पहुंची। जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर मामले की जांच करते हुए कार्रवाई की मांग की है।
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सदर थाना क्षेत्र के बर्डपुर नंबर-12 पकडिहवा गांव की महिलाओं ने बताया कि एक कोटेदार है, जिसने कहा कि एक बैंक से सरकारी अनुदान मिल रहा है। इसमें आधार कार्ड आदि दस्तावेज लिए और अंगूठा लगवा लिया।
साथ ही अनुदान की बड़ी राशि मिलेगी, यह कहते हुए पांच-पांच हजार रुपये भी ले लिए। इसके बाद रुपये तो नहीं मिले, लेकिन कुछ दिन बाद पहले एक बैंक के कुछ लोग पहुंचे और किसी को एक लाख तो किसी को 50 हजार और डेढ़ लाख रुपये कर्ज होना बताकर जमा करने का दबाव बनाने लगे। धमकियां भी दी जाने लगीं कि अगर रुपये जमा नहीं किए तो सामान जब्त कर लिया जाएगा।
इसमें उनकी ओर से बताया गया कि चार-चार बैंक से एक-एक व्यक्ति के नाम से कर्ज है, जबकि एक जगह अंगूठा कोटेदार के कहने पर लगाया। अब चार-चार बैंकों का कर्ज कहां से भरेंगे। कोटेदार के पास गए तो वह कुछ नहीं बोल रहा है। उधर बैंक वाले दबाव बना रहे हैं। अब कहां से कर्ज भरेंगे, हमारे साथ धोखा हुआ है।
ऐसा संजना, पप्पू, माया, साकिम, राजमति, लक्ष्मी, सरस्वती, उषा, रीता, प्रमिला, सुनीता, मीना, उर्मिला, सुनीता, विषणु, संजू, निरही ने यह आरोप लगाया और मामले की जांच करके कार्रवाई करने की मांग की।
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जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायती पत्र ले लिया गया और पीड़िता को कार्रवाई करने का भरोसा दिलाते हुए भेज दिया गया।
बोलीं पीड़ित महिलाएं : पीड़िता निरही ने बताया कि अनुदान मिलने की उम्मीद थी, इसलिए अंगूठा लगा दिया। हमें क्या पता था कि और कर्ज में डूब जाएंगे। अब समझ में नहीं आ रहा है, क्या करें। प्रमिला ने कहा कि कोटेदार के कहने पर विश्वास में आ गए और आधार कार्ड देने के साथ अंगूठा लगा दिया। अनुदान तो मिला नहीं और कर्जदार बन गए। एक बैंक वाले आए थे, वह रुपये मांग रहे हैं।
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