भगवानदास की जहां मौत हुई है, घटना स्थल से उसके घर से महज पांच सौ मीटर दूरी पर है। जहां पर पूरा परिवार रहता है। लेकिन हादसा होने के काफी समय बाद जब पुलिस ने सूचना दिया कि यहां हादसा हुआ और भगवानदास की मौत हो गई तो उनकों जानकारी हुई। इससे लोग हैरत में पड़ गए। घटना की जानकारी मिलते ही सभी लोग रात में ही जिला अस्पताल पहुंचे।
दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मृतक भगवान दास स्वभाव से बड़ा अच्छा था, ऐसा घर पहुंचने वाले हर व्यक्ति की जुबान था। लोगों को कहना था कि वह बहुत ही मेहनती थी। दिनभर गाड़ी धुनाई का कार्य करता था, जैसे ही कोई गाड़ी से कहीं जाने की बात करता था, उसके साथ चला जाता था। जिससे कुछ रुपये की आमदनी हो जाए। तीन भाईयों में वह सबसे छोटा था, जिसकी मौत की खबर में सबको झकझोर दिया।
वहीं, मौत के बाद मां पुष्पा को रोता हुआ देख पांच वर्षीय पुत्र प्रिंस रह रहकर रो रहा था। जबकि चार वर्षीय दिव्या घर पर महिलाओं की भीड़ और मां को रोता हुआ देखकर समझ ही नहीं पा रही थी क्या हुआ। वहीं मौत के बाद बड़े भाई रामधनी और मझले भाई रामदास रह रहकर फफक कर रो पड़ते थे। घर पहुंचने वाले हर व्यक्ति की आंख नम हो जा रही थीं, उनका कहना था कि दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।