सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में 20 दिन के अंदर ट्रामा सेंटर तैयार हो जाएगा। उसके बाद गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर होने की मुसीबत कम हो जाएगी। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में ट्रामा सेंटर होगा, तो हादसे के गंभीर मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज मिल जाएगा। तमाम मरीजों का इलाज हो जाएगा और कर्ज के बोझ तले भी नहीं दबेंगे।
मेडिकल कॉलेज में सीएसआर प्रोजेक्ट के अंतर्गत 3.99 करोड़ रुपये से ट्रामा सेंटर बनाया गया है, जिसमें 2.20 करोड़ रुपये के उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार टेंडर लेने वाली फर्म ने सामान भेज दिया है और चार दिन के अंदर उपकरण आने शुरू हो जाएंगे। सभी उपकरणों के आपूर्ति होने के बाद एक सप्ताह के अंदर इंस्टाल करने की प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी। उसके बाद गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू, वेंटिलेटर सहित अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
इमरजेंसी में 24 घंटे में 70 से 100 मरीज आते हैं, जिनमें 15-20 मरीज सड़क या अन्य दुर्घटना वाले होते हैं। इनमें संसाधनों के अभाव में गंभीर मरीजों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया जाता है। कुछ मरीजों की स्थिति रास्ते में गंभीर हो जाती है, क्योंकि जब उन्हें तत्काल सर्जरी या बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता होती है तो वे मार्ग में होते हैं।
विशेषज्ञ उपलब्ध, बेहोशी के डॉक्टर चाहिए : मेडिकल कॉलेज में आर्थों एवं जनरल सर्जन हैं, जबकि मैक्सिलोफेशियल सर्जन भी हैं। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ एक भी नहीं हैं, ऐसी स्थिति में आईसीयू का संचालन मुश्किल होगा। एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ प्राप्त हो जाएं तो मेडिसिन विशेषज्ञों के सहयोग आईसीयू का संचालन भी किया जा सकता है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डीजीएमई लखनऊ को पत्र भेजकर एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी में एसआर भेजने की सिफारिश की है, जबकि नई नियुक्ति की कोशिश भी की जा रही है। कॉलेज प्रशासन ने सीएमओ से भी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ उपलब्ध कराने की मांग है। न्यूरो सर्जन उपलब्ध हो जाए तो ट्रामा सेंटर का और बेहतर उपयोग हो सकता है।
20 बेड का आईसीयू : मेडिकल कॉलेज में एडल्ट आईसीयू नहीं है, जबकि ट्रामा सेंटर में 20 बेड का आईसीयू भी होगा। दो वेंटीलेटर, सी आर्म मशीन, पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड एवं एक्स-रे मशीन एवं 10 बेड जनरल की सुविधा मिलेगी।