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आज उठ जाएगा लोगों के हार-जीत के दावों से पर्दा

Sat, 12 Dec 2015 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
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जीत-हार के दावों के बीच उलझी गवईं सियासत का तिलिस्म बस टूटने वाला है। चार चरणों में हुए चुनाव के नतीजों को जानने के बेकरार दिलों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। प्रत्याशियों के जीत के दावों की हकीकत सामने आने में चंद घंटों का इंतजार काटे नहीं कट रहा।
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 नतीजों को लेकर जितनी बेचैनी प्रत्याशियों में है उससे कहीं ज्यादा समर्थकों व मतदाताओं में देखी जा रही है। हर कीमत पर जीत पक्की करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाने वाले प्रत्याशियों की तो नींद उड़ी हुई है। वोटरों के हर पैमाने पर खरा उतरने की कोशिश कर चुके प्रत्याशियों को अब इंतजार है तो बस नतीजों का।

पिछले एक माह से गर्म गवईं सियासत के लिए आज का दिन बेहद खास है। अगले पांच सालों के लिए गांव की सरकार बननी है। सरकार का मुखिया बनने के लिए दम लगाने वाले प्रत्याशियों ने दिन रात एक करके वोटरों को अपने पाले में लाने की हर संभव कोशिश की।
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राजनीतिक गुणा-गणित व कयासों का दौर खत्म होने वाला है और मतपेटियों के खुलने के साथ ही सारी हकीकत सामने आ जाएगी। इसी के साथ यह भी साफ हो जाएगा कि किसके सिर पर ताज बंधेगा और चुनावी मैदान में उतरे कितने लोगों को धराशायी होना पड़ा।

मतदान समाप्त होने के बाद से ही प्रत्याशियों ने पड़े मतों में से अपनी हिस्सेदारी का जोड़ लगाना शुरू कर दिया था। वोटों के जोड़-घटाने में प्रत्याशियों से ज्यादा उनके समर्थक व गवईं राजनीति में दिलचस्पी लेने वाले मतदाता मशगूल रहे। इतना ही नहीं जीत के दावों को लेकर  गांवों में प्रतिद्वंद्वियों के बीच विवाद हुआ और कुछ जगहों पर तो मामला मारपीट तक भी पहुंच गया।

चुनाव को लेकर गांवों में पैदा हुई गुटबाजी के चलते माहौल में भी काफी तल्खी रही और नोकझोंक के चलते आपसी संबंधों में कटुता आई। सीधे शब्दों में कहा जाए तो पंचायत चुनाव के दौरान आमतौर पर शांत रहने वाले गांव का मिजाज किसी राजनीतिक अखाड़े सरीखा हो गया।

पंचायत चुनाव के इन नकारत्मक पहलुओं से अलग यदि हम इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के चश्में से देखें तो इसमें काफी हद तक लोकतंत्र के खूबसूरती की भी एक झलक मिलती है। अपने मत व प्रत्याशियों को लेकर वोटरों में आई जागरूकता के कारण ही चुनाव के दौरान राजनीतिक सरगर्मी पूरे सबाव पर रही।

 एक-एक वोट सहेजने में लगे प्रत्याशियों के साथ-साथ वोटरों को भी इस चीज का एहसास हो गया कि लोकतंत्र में मत की कीमत क्या होती है। मजबूत लोकतंत्र की नींव समझे जाने वाले पंचायत चुनाव को सकुशल संपन्न कराने में प्रशासनिक अमले ने दिन रात एक कर दिया था।

अब उनके ऊपर निष्पक्ष व पारदर्शी मतगणना कार्य कराने की जिम्मेदारी है। जिसके लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ मतगणना केंद्रों पर अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम लगाई है। मामूल घटनाओं को छोड़ दें तो पंचायत चुनाव के लिए चार चरणों में हुआ मतदान सकुशल संपन्न कराने में प्रशासनिक अमला सफल हुआ। मतगणना कार्य को भी सुचारु ढंग से कराने के लिए प्रशासन ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

 इसके लिए जिले में कुल 14 मतगणना केंद्र बनाए गए हैं। केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और विजय जुलूस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है। नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई का फरमान जारी किया गया है। फिलहाल प्रशासनिक चुस्ती के बीच मतगणना के बाद नतीजा चाहे जिस के पक्ष या विपक्ष में आए लेकिन लोकतंत्र की सौ फीसदी जीत तो पक्की ही है।
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