- रतनसेन डिग्री काॅलेज बांसी में सोमवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आयोजित हुआ कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। रतनसेन डिग्री काॅलेज में सोमवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक और स्वयंसेविकाओं ने मनाया। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. सुभीर सिंह ने मां सरस्वती व स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर किया।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जन्मदिवस 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश के युवाओं को समर्पित इस दिन को मनाने का एक खास उद्देश्य है। स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बचपन से ही अध्यात्म में रुचि रखने वाले नरेंद्रनाथ ने 25 साल की उम्र में संन्यास ले लिया। संन्यास लेने के बाद वह दुनियाभर में विवेकानंद के नाम से मशहूर हुए।
वह वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु रहे। स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो में हुए धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यहां उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत जैसी ही मेरे प्रिय अमेरिकी भाइयों और बहनों के साथ किया, पूरी सभा तालियों से गूंज गई। भाषण के दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृत विचारों से लोगों को परिचित कराया, समाज में फैली बुराइयों पर जमकर कुठाराघात किया। वहां मौजूद सभी लोग युवा विवेकानंद से अभिभूत थे।
डाॅ. हंसराज कुशवाहा ने बताया कि एक बार स्वामी विवेकानंद अपने आश्रम में सो रहे थे, तभी एक व्यक्ति उनके पास आया जो बहुत दुखी था और आते ही स्वामी के चरणों में गिर पड़ा और बोला महाराज मैं अपने जीवन में खूब मेहनत करता हूं, हर काम खूब मन लगाकर करता हूं, फिर भी आज तक मैं कभी सफल व्यक्ति नहीं बन पाया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डाॅ. दयाशंकर, डाॅ. देवेंद्र प्रसाद, डाॅ. हंसराज, डाॅ. अरविंद कुमार मौर्य, डाॅ. अखिलेश कुमार उपाध्याय, डाॅ. रविरेश सिंह, राजेश कुमार शर्मा , कुमकुम, शालू, सपना, सुमन, शालिनी, ममता, संध्या, श्रेया आदि मौजूद रहे।