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ढाई गुना नोट देने का लालच देकर ठगी करने में तीन गिरफ्तार

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ढाई गुना नोट देने का लालच देकर ठगी करने में तीन गिरफ्तार
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सिद्धार्थनगर। एक के बदले ढाई गुना नोट देने का लालच देकर ठगी करने के तीन आरोपितों को एसओजी और सदर पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार सुबह नगर के हाईडिल तिराहे से दबोच लिया। ज्यादा नोट देने में ये जाली नोटों और कागज की गड्डी का भी इस्तेमाल करते थे। तीनों के कब्जे से नोट के बीच कागज के 10 बंडल और नकदी बरामद की गई। ठगों के इस गिरोह मेें एक नेपाली नागरिक भी शामिल है। यह गिरोह अब तक गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, आजमगढ़ और नेपाल में कई वारदातों को अंजाम देकर लाखों की ठगी कर चुका है। पुलिस टीम इस गिरोह के अन्य सदस्यों की धरपकड़ के लिए लगी हुई है।
पुलिस लाइंस सभागार में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि एसओजी प्रभारी जीवन त्रिपाठी को मुखबिर से सूचना मिली कि ज्यादा नोट देने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य आ रहे हैं। कोतवाल सदर तहसीलदार सिंह, चौकी इंचार्ज पुरानी नौगढ़ चंदन कुमार, जेल चौकी प्रभारी रामदरश यादव की संयुक्त टीम बताए हुए स्थान पर पहुंच गई। वहां तीन संदिग्ध आते हुए दिखे। रोककर उसने पूछताछ की गई और बैग चेक किया गया तो उसमें कागज के बंडल के बीच नोट दिखे।
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पूछताछ में तीनों की पहचान निजामुद्दीन निवासी परसियां थाना बांसगांव जनपद गोरखपुर, धीरज राजभर निवासी तवक्कलपुर थाना तरकुलवा जनपद देवरिया, गंगाराम यादव निवासी हरदी जनपद रुपन्देही नेपाल के रूप में हुई। पूछताछ में तीनों ने बताया कि उनकी ओर से नकली-असली नोटों के बने हुए बंडलों से भरा हुआ बैग नेपाल के किसी व्यक्ति को देकर ठगने की तैयारी थी। बैग से मिश्रित रुपये के साथ असली नोटों के कुल 10 बंडल और एक बाइक, 12 हजार रुपये, चार मोबाइल फोन, तीन आधार कार्ड बरामद किए गए। पूछताछ करने के बाद तीनों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। एसपी ने तीनों को पकड़ने वाली पुलिस टीम को 20 हजार का इनाम देने की घोषणा की।
अपराध का तरीका
पुलिस टीम के मुताबिक, पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि लोगों को अपने जाल में फंसाकर नकली नोटों को देने का आश्वासन देकर नमूना के रूप में सही नोट में विशेष प्रकार का कलर लगाकर दिया जाता था। विश्वास में लेकर सही नोट को ही गलत के रूप में प्रस्तुत किया जाता था। अगले व्यक्तियों से सही मुद्रा के बदले ढाई गुना नकली नोटों के बंडल बैग में भरकर दिखाया जाता था। उसमें बंडल में ऊपर व नीचे सही नोट लगाकर बीच में कागज की गड्डी को लगाया जाता था। इस प्रकार से लोगों को जाल में फंसाकर ठगी की जाती थी।
ठगी का शिकार हुआ तो बन गया गिरोह का सदस्य
पुलिस के मुताबिक, गोरखपुर के बांसगांव क्षेत्र के परसिया निवासी निजामुद्दीन से आरोपित धीरज और गंगाराम ने एक लाख का ढाई लाख देने के नाम पर तीन लाख रुपये की ठगी थी। उसके बाद जब वह रकम मांगने के लिए इन दोनों के पीछे पड़ा तो उसे भी गिरोह में शामिल कर लिया गया। फिर तीनों ने और लोगों के साथ मिलकर कई वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, नोट देने के नाम पर ठगी करने के मामले में पकड़ा गया धीरज राजभर कुशीनगर जनपद में पकड़ में आया था। पुलिस के मुताबिक, इस कार्य में छोटेलाल नाम का एक सिपाही संलिप्त पाया गया था, जिसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ था और वह जेल भेज गया था। धीरज ने जेल से छूटने के बाद फिर से ठगी शुरू कर दी।
नेपाल में सोना के बदले देते थे नोट, गोरखपुर का सफेदपोश भी शामिल
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह नेपाल में सोने के बाद कागज और नोट देकर कई लोगों को ठगी का शिकार बना चुका है। इस बार भी यह गिरोह नेपाल के किसी व्यक्ति को ठगने के लिए निकला था, मगर एसओजी के हत्थे चढ़ गया। बताया जा रहा है कि इस गिरोह की जड़ आजमगढ़ और बिहार में गहरी है। वहीं से नेटवर्क संचालित होता है। इस कार्य में कई लोगों के संलिप्त होने की आशंका है। साथ ही गोरखपुर के एक सफेदपोश के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। पुलिस की निगाह उस नेता पर भी जमी हुई है। रकैटे के अन्य लोगों के पकड़ में आने के बाद नेता गिरफ्त में आ सकता है। तीन लोग और निशाने पर आए हैं, जो जल्द ही पुलिस के हत्थे चढ़ जाएंगे।
लालच में रकम गंवाने वाले शिकायत नहीं कर पाते थे
ठगों का यह गिरोह इतना शातिर तरीके से काम करता था कि ठगी का शिकार होने वाला न तो शिकायत कर पाता था, न ही खुलकर कुछ बोल सकता था। लालच में आकर कई लोग इस गिरोह के शिकार बने। एक लाख का ढाई लाख और वह भी नकली नोट के लेने के नाम पर ठगी का शिकार कई लोग हुए। शिकायत करने पर वह भी दोषी होता, इस डर से पीड़ित मुंह खोलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
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केमिकल लगाकर नोट को बताते थे नकली
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि सही नोट को नकली साबित करने के लिए वे एक केमिकल लगाते थे। उसके लगाने के बाद असली नोट भी रंग छोड़ता है, इस लिए लोग यह देखने के बाद उनके झांसे में आ जाते थे।
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