संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अल कायदा इन इंडियन सब कांटीनेंट (एक्यूआईएस) की विचारधारा से जुड़े मॉड्यूल की गिरफ्तारी के बाद आतंकी गतिविधियों काे लेकर संवेदनशील जनपद एक बार फिर चर्चा में है। एटीएस के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों का प्लान इन युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर ‘मुजाहिदीन’ के रूप में तैयार करना था।
मकसूद और आजमगढ़ से पकड़े गए उसके साथी मोहम्मद नबील का काम सिर्फ सामग्री शेयर करना नहीं था। ये दोनों व्हाट्सएप और टेलीग्राम के डार्क ग्रुप्स के जरिये देश के अलग-अलग राज्यों से ऐसे युवाओं को चिह्नित कर रहे थे, जो आसानी से बहकावे में आ सकें।
इसके लिए उन्हें आधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग देने और इसके एवज में बड़ी टेरर फंडिंग (फंड जुटाने) की भी प्लानिंग चल रही थी, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया। बताया यह भी जा रहा है कि मकसूद के फोन के डिजिटल फॉरेंसिक डाटा और दोनों आरोपियों के आमने-सामने के बयानों के बाद यूपी एटीएस को पांच से छह ऐसे सक्रिय संदिग्धों के सुराग मिले हैं, जो सीधे तौर पर इस ऑनलाइन मॉड्यूल को ऑपरेट कर रहे थे।
इनपुट के बाद देश के कई राज्यों में संदिग्धाें की धरपकड़ पर काम शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी जनपद में संबंधित जांच एजेंसी के आने और मूवमेंट की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
सुरक्षा एजेंसियों जांच और सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि मकसूद ग्रुप के माध्यम से उनसे जुड़ा था। पाकिस्तानी आतंकी संगठन से जुड़े लोगों की गतिविधियों में शामिल होकर उसे आगे बढ़ाने का काम कर रहा था। यह एक स्लीपर सेल का रोल हो सकता है। यह पहले खुद ट्रेंड होते हैं और फिर अपनी विचारधारा से जुड़े लोगों को कनेक्ट करते हैं। उन्हें देश विरोधी गतिविधि में शामिल करने के लिए ब्रेनवॉश करते हैं।
जनपद की 68 किलोमीटर सीमा से नेपाल बाॅर्डर से लगी हुई है। आतंकी गतिविधियों के साथ तस्करी तक हर मामले यह जिला संवेदनशील है।
14 सितंबर को यूपी एटीएस की टीम ने तमिलनाडु के कोयंबटूर से मकसूद को गिरफ्तार किया। उसकी धरपकड़ आजमगढ़ निवासी नबील से मिले इनपुट के आधार पर की गई।
एटीएस की ओर से उसे मिले साक्ष्य और इनपुट के आधार पर जांच कर रही है। अभी तक आरोपी के घर या लोकल पुलिस से संपर्क नहीं किया है लेकिन जांच और जो तथ्य अबतक सामने आए हैं, उससे उसके इरादे खतरनाक पाए गए हैं।