सिद्धार्थनगर। मौसम में जारी उतार-चढ़ाव बच्चे और बुजुर्गों के लिए मुसीबत बन गया है। इससे जहां बच्चे बुखार, जुकाम, खांसी से प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, बुजुर्ग भी खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी झेल रहे हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के कक्ष में बच्चों की संख्या अधिक रही है। इसमें कई बच्चे तो ऐसे थे, जिनको जकड़न के कारण सांस लेने में तकलीफ भी महसूस हो रही थी। इसके अलावा फिजिशियन के वार्ड में बुजुर्ग पहुंचे थे, जिन्हें सीने में जकड़न के साथ खांसी की शिकायत थी। डॉक्टर जांच के साथ ही दवा लेने की सलाह दी। इसके साथ ही बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी। डॉक्टरों का कहना था कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण यह समस्या हो रही है, अभी इससे निजात मिलने की उम्मीद नहीं है।
मौसम में बदलाव होने के साथ मौसम की बीमारी गिरफ्त में लेने लग रही है। मौजूदा समय में कुछ ऐसे ही हालात बने हुए हैं। मंगलवार को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विशेषज्ञ के कक्ष में पहुंचे। यहां बालरोग विशेषज्ञ डॉ. संजय अग्रहरि के कक्ष में दोपहर 12 बजे तक 65 बच्चों को ओपीडी में देखा जा चुका था। इसमें अधिकांश बच्चे खांसी और बुखार के शिकार थे। उसका क्षेत्र की रहने वाली मीना ने बताया कि एकाएक बच्चा रोने लगा। इसके बाद बुखार से शरीर तपना शुरू हुआ। एक मेडिकल स्टोर से दवा लेकर आई, तीन दिन में ठीक नहीं हुआ तो यहां लेकर पहुंची हूं। डॉक्टर ने देखने और लक्षण के हिसाब से ठंड का लगना बताया।
वहीं, रियाज के बच्चे को सांस लेने में घरघराहट थी, साथ ही वह हमेशा रो रहा। रियाज के मुताबिक वह पिछले कई दिनों से परेशान था और जो दवा ली थी काम नहीं कर रहा था, इसलिए लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इसी प्रकार की समस्या अन्य बच्चों में देखने को मिली। इसके अलावा फिजिशियन डॉ. सीबी चौधरी के वार्ड में पहुंचे। यहां पर बुजुर्ग मरीजों की संख्या अधिक थी। किसी को सीने में दर्द और जकड़न की शिकायती थी तो कोई कई दिनों से बुखार से पीड़ित होना बता रहा था तो किसी को कमजोरी की शिकायती थी। डॉक्टर ने जांच के साथ ही दवा लिखी और बताया कि अभी मौसम अनुकूल नहीं हुआ है, इसलिए गर्म कपड़े जरूर पहने। अगर बीपी के शिकार हैं तो मौसम अनुकूल होने तक दवा नियमित लेते हैं। इसी प्रकार बांसी जिला अस्पताल का हाल है। यहां पर बच्चे और बुजुर्गों की संख्या अधिक रही है। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. फजल खान ने बताया कि 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि मरीजों में हुई है। खास करके बच्चों की संख्या अधिक है।
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खांसी से बुखार से ग्रसित मरीजों की संख्या अधिक
भारतभारी। बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी-बुखार खांसी की समस्या अधिक हो रही हैं। तापमान और आर्द्रता में बदलाव के कारण वायरस पनपते हैं। बदलते मौसम में बच्चों में भी हो रही सर्दी खांसी बुखार वायरल की शिकायत हो रही है, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) कमजोर हो जाती है। दिन में धूप और रात में हल्की सर्दी के चलते लोग बीमार हो रहे हैं। मंगलवार को बेंवा सीएचसी पर तैनात बाल रोग विशेषक चिकित्सक डॉ. महेश कुमार वर्मा ने बताया कि इसके आम लक्षण नाक बहना गले में खराश, छींक और तेज बुखार या मांसपेशियों में दर्द हैं। संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर का तापमान बढ़ाने के लिए बुखार एक सामान्य प्रतिक्रिया है। बड़ों में परेशानी होने पर इसके लिए गर्म-नमक पानी से गरारे करना या शहद के साथ गर्म नींबू पानी पीना जैसे घरेलू उपचार मदद कर सकते हैं। बदलने वाले मौसम में सर्दी- वायरल बुखार के मरीज अधिक आ रहे हैं। 70 प्रतिशत मरीजों में बदलते मौसम के कारण समस्या है।
डॉ. महेशा वर्मा ने बताया कि वायरस का प्रसार तापमान और आर्द्रता में बदलाव से राइनोवायरस जैसे वायरस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनता है, जो सर्दी का एक आम कारण है। मौसम के अचानक बदलाव के साथ शरीर को नई परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में समय लगता है, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल तिलौली में 65 बच्चे ओपीडी में पहुंचे थे। इसमें मौसमी बुखार सर्दी जकड़न के मरीज आए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि बच्चे ज्यादा आ रहे हैं, जिनका इलाज कर दवा और नेबुलाइजर देकर इलाज किया जा रहा है।
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बोले विशेष
मौसम में उतार चढ़ाव जारी है, ऐसे बच्चों को गर्म कपड़े में ही रखें। बाहर की वस्तुओं का न खिलाएं। पानी को गुनगुना करने के बाद ही पिलाएं। अगर सर्दी से जकड़न हो रहा है तो भाप जरूर हैं। अगर समस्या अधिक हो रही तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं और उसके बाद ही दवा दें। क्योंकि, वायरल का समय शुरू हो रहा है। दस्त के मामले में भी बढ़ेंगे। ऐसे में अभिभावकों को बच्चाें की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
- डॉ. फजल खान, बालरोग विशेषज्ञ