तीन दशक से दब रही है संगलदीप के विकास की आवाज
संगलदीप के लोगों ने किया था बहिष्कार, फिर किया मतदान
-लोकसभा चुनाव 2019 में भी गांव के लोगों ने किया था मतदान का बहिष्कार
सिद्धार्थनगर/टड़िया बाजार। तीन ओर से राप्ती नदी से घिरे संगलदीप गांव के विकास की आवाज तीन दशक से दब रही है। बुनियादी सुविधाओं के लिए गांव के लोगों ने लामबंद होकर समय-समय पर आवाज उठाई, लेकिन विकास का पहिया गांव तक नहीं पहुंचा। इस गांव में जाने के लिए सड़क का अभाव है तो शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। बाढ़ प्रभावित गांव में खेत हर साल डूब जाते हैं। ऐसे में रोजी रोटी के लिए लोगों का पलायन करना मजबूरी है।
जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दूर संगलदीप गांव अपने विकास के आंदोलनों के लिए लोगों की जुबान पर चढ़ गया है, लेकिन जिम्मेदारों ने वहां के विकास की राह नहीं निकाली है। क्षेत्र के अमरिया से संगलदीप तक करीब डेढ़ किमी दूर बना बांध बाढ़ में विलीन हो गया, उसके बाद अब तक न बांध बना और न ही आने-जाने के लिए सड़क। सिंचाई विभाग ने नदी की धारा को मोड़ने का कार्य किया गया था, लेकिन बांध के किनारे पत्थर नहीं लगाए गए और सारा कार्य बाढ़ में विलीन हो गया। ग्रामीणों के अनुसार जिला प्रशासन ने इस गांव को कहीं और बसाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह प्रयास धरातल पर नहीं उतरा।
गांव में है प्राथमिक विद्यालय
संगलदीप में प्राथमिक विद्यालय है, लेकिन पूर्व माध्यमिक व उच्च स्तर की शिक्षा के लिए बच्चों को नदी के किनारे डेढ़ किमी पैदल जाना पड़ता है। अस्पताल भी सात किमी दूर है। गांव तक सड़क नहीं जाती है, इस कारण बीमार लोगों को चारपाई के सहारे अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। गांव की आबादी 1500 है।
गांव के राजदेव यादव ने कहा कि अमरिया से संगलदीप गांव की दूरी लगभग 1.5 किमी है। सड़क निर्माण हो और उसके दोनों ओर पत्थर लगा दिए जाएं तो गांव का रास्ता बन जाएगा। मजनू यादव कहते हैं कि सड़क नहीं होने के कारण गांव में एंबुलेंस नहीं जा पाती है। दिनेश यादव का कहना है कि सरकारी स्तर पर गांव के विकास के लिए सार्थक प्रयास नहीं किए गए। फूलचंद यादव ने कहा कि तीन दशक से गांव के लोग विकास की बाट जो रहे हैं।
लोकसभा चुनाव में भी किया था बहिष्कार
विधानसभा चुनाव में संगलदीप गांव के लोगों ने विकास नहीं होने के विरोध में मतदान का बहिष्कार कर दिया था। सुबह 10.30 बजे तक मात्र तीन लोगों ने मतदान किया था। उसके बाद अधिकारियों की टीम गांव में पहुंची और लोगों को समझाया तो मतदान शुरू हुआ। इसके पहले लोकसभा चुनाव 2019 में भी गांव के लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया था, लेकिन समझाकर मतदान करने वाले जिम्मेदारों ने बाद में विकास कराने का वादा नहीं निभाया।
संगलदीप गांव के विकास के लिए बीडीओ से रिपोर्ट मांगी गई है। वहां की समस्याओं की रिपोर्ट प्राप्त होने पर विकास के लिए ठोस पहल की जाएगी।
पुलकित गर्ग, सीडीओ
नदी में कार गिरने से हुई थी तीन की मौत
उसका। अमरिया ग्राम पंचायत के टोला संगलदीप में कच्चे मार्ग से रिश्तेदारी में आ रहे कार सवार एक ही परिवार के तीन लोगों की राप्ती नदी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई थी। यह हादसा 14 मार्च 2020 को हुआ था। कार चालक बालू में ऊपर चढ़ने की कोशिश कर रहा था तभी गाड़ी गिरते हुए नदी में चली गई। किसी को बचने को मौका नहीं मिला। नदी के मोड़ पर यहां हादसे की आशंका बनी रहती है।