संवाद न्यूज एजेंसी
शोहरतगढ़। क्षेत्र के जगरगठिया गांव में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन रविवार शाम को कथावाचक आचार्य पुडेंद्र शरण शुक्ल ने मित्रता के मायने समझाते हुए श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की अटूट मित्रता की कथा का श्रवण करवाया। उन्होंने कहा कि मित्रता एक अनूठा बंधन है जो जाति-धर्म, रीति-रिवाज आदि से ऊपर है। एक सच्चा मित्र अपनी मित्रता के लिए सब कुछ करने को तत्पर होता है।
उन्होंने कहा कि सुदामा गरीब नहीं थे, उनके पास भगवान की अटूट भक्ति थी। ईश्वर की भक्ति की शक्ति थी और भगवान श्रीकृष्ण को उनका यही स्वाभिमान बहुत प्यारा था। उन्होंने बताया कि मित्र सुदामा से मिलने नंगे पाव द्वारकापुरी से जिस तरह दौड़े, वह मित्रता की छाप छोड़ गया। श्रीकृष्ण ने मित्र सुदामा को अपनी बाहों में भर लिया। उनकी सेवा की और चरण धोए। सुदामा ने भगवान से कुछ भी नहीं मांगा तो भगवान ने सुदामा का भाव देखकर उनको एक लोक की संपदा उन्हें दे दी। उन्होंने कहा कि भगवान के पास निस्वार्थ भावना के साथ जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा का वर्णन भी किया।
इस अवसर पर श्रीकृष्ण और सुदामा की जीवंत झांकी ने श्रद्धालुओं भाव विभोर किया। कथा के दौरान भजन-गीत से श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। इस दौरान धनुषधारी मिश्रा, सोनू, अभिमन, भोला भोलू, गोलू आदि रहे।