सेमरियावां। चांद दिखने के साथ ही माह-ए-रमजान का पहला रोजा बृहस्पतिवार से शुरु होगा। जिसके साथ ही रमजान शरीफ का पहला अशरा ‘’रहमत’’ का शुरु हो गया। माह-ए-रमजान का पहला रोजा करीब 12 घंटा 51 मिनट का होगा। रमजान का पहला रोजा सबसे छोटा व अंतिम रोजा सबसे बड़ा होगा। रमजान को लेकर लोगों में काफी उत्साह है।
माह-ए-रमजान की आमद से नगर में रौनक छा गई। मुस्लिम समाज में खुशियां फैल गई। लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद पेश की। सोशल मीडिया पर रमजान की खास दुआ व मुबारकबाद के मैसेज शेयर किए गए। सभी लोग अल्लाह की इबादत में जुट गए और गुनाहों की माफी मांगी। चांद की पुष्टि होने के बाद बुधवार से ही तरावीह की नमाज शुरु हो गई। पुरुषों ने मस्जिद में तरावीह की नमाज अदा की।
घरों में महिलाओं ने तरावीह की नमाज पढ़ी। नमाज, कुरआन-ए-पाक की तिलावत, तस्बीह व दुआ का सिलसिला चल पड़ा, जो लगातार एक माह तक जारी रहेगा। लोगों ने अल्लाह की हम्द व सना की और इबादत में लग गए। एक महीने बाद खुशियों का त्योहार ईद परंपरा के अनुसार मनाया जाएगा। मुस्लिमों के लिए रमजान का महीना बहुत ही मुबारक महीना माना जाता है। इस माह में मुस्लिम लोग रमजान के पूरे महीने रोजा रखते हैं। कुरान की तिलावत करते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं।
माैलाना नुरूल हुदा ने बताया कि पांच साल के बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई पांचों वक्त की नमाज अदा करता है। रमजान उल मुबारक अरबी महीनों का सबसे अच्छा महीना माना जाता है। रमजान उल मुबारक माह को दस-दस दिन के तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात का है। बताया जाता है कि इस माह में किए अल्लाह की इबादत, जिक्र, अमल का सवाब अन्य महीनों की अपेक्षा 70 गुना ज्यादा मिलता है। मुस्लिम समाज के लोग पूरे महीने रोजे रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं।
जामिया अरबिया उमर फारूक दरियाबाद के मौलाना रहमतुल्लाह नूर कासमी कहते हैं कि रोजा हर मुसलमान मर्द, औरत, आकिल, बालिग पर फर्ज है। रमजान में एक खास नमाज़ ए तरावीह अदा की जाती है। जो रमजान में एक बड़ा तोहफा है। मुसलमानों को इस बरकत महीने में रोजा, नमाज, कुरान की तिलावत व अल्लाह की इबादत कर अपने पिछले गुनाहों की मांफी मांगनी चाहिए।