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Siddharthnagar News: बार्डर पर ढील से बाजार में लौटी रौनक, व्यापारी खुश

Mon, 18 May 2026 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु जिले के मर्यादपुर कस्बा में रविवार को चहल-पहल बढ़ी। संवाद
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में बालेंद्र शाह की अगुवाई वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद सीमावर्ती भारतीय और नेपाल के मधेश इलाके में निवास और कारोबार करने वालों ने तरक्की और कारोबार के बेहतर माहौल की उम्मीद की थी। लेकिन, नेपाल सरकार की ओर से 100 रुपये से अधिक के भारतीय मूल्य के सामान नेपाल में लेकर जाने पर भंसार के रूप में टैक्स की व्यवस्था कर दी गई। जो सीमावर्ती नेपाली नागरिकों और भारतीय बाजार के कारोबारियों को अव्यवहारिक लगा।
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इसे लेकर विरोध शुरू हो गया। सरकार ने कानून को पुराना बताया पर लोगों में असंतोष बढ़ गया था। इस मामले को नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लेकर इस आदेश को दो दिन पूर्व पूर्ण रूप से निष्प्रभावी करने का आदेश दे दिया।
बढ़नी और खुनुवां बाॅर्डर पर कारोबार और आवाजाही देखी गई और अन्य दिनों की तुलना में सख्ती कम दिखी। वहीं, नेपाल में जाने वालों और भारतीय दुकानदारों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि आज ग्राहक बढ़े हैं आने वाले दिनों में और बेहतर होने की उम्मीद है।
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खुनुवां बाजार में बढ़ी रौनक, बेरोक-टोक सामान ले गए नेपाली ग्राहक
खुनुवां। रविवार को खुनुवां के साप्ताहिक बाजार में बड़ी संख्या में नेपाल के लोग पहुंचे और रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदकर बिना किसी रोक-टोक के अपने घरों को लौटते नजर आए।
सीमा क्षेत्र में स्थित खुनुवां बाजार में सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ रही। किराना, कपड़ा, सब्जी, बर्तन और घरेलू उपयोग की अन्य दुकानों पर खरीदारी करने वालों की अच्छी खासी भीड़ देखी गई। बाजार में पहुंचे नेपाली नागरिकों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें राहत मिली है और अब जरूरत का सामान लाने-ले जाने में पहले जैसी परेशानी नहीं हो रही है।
एपीएफ जवान ड्यूटी पर मुस्तैद दिखाई दिए, लेकिन दैनिक जरूरत के सामान लेकर जाने वाले लोगों को किसी प्रकार से रोका नहीं गया। इससे सीमा पार आने-जाने वाले लोगों में सहजता का माहौल देखने को मिला। स्थानीय व्यापारियों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। व्यापारियों का कहना है कि ड्यूटी लगाए जाने के बाद सीमावर्ती बाजारों का कारोबार प्रभावित हो रहा था, लेकिन अंतरिम रोक के बाद बाजार में फिर से रौनक लौट आई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच वर्षों से चली आ रही पारंपरिक आवाजाही और खरीदारी व्यवस्था से दोनों देशों के नागरिकों का जीवन जुड़ा हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आम लोगों के लिए राहत भरा साबित हो रहा है।
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व्यक्तिगत समानों पर नहीं दिखी सख्ती

ढेबरूआ। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बढ़नी-कृष्णानगर बॉर्डर पर रविवार को लोगों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत जरूरत के लिए खरीदे गए समानों पर अब अनावश्यक रोक-टोक नहीं हो रही है। बढ़नी के राकेश कुमार, कुनकुन रस्तोगी ने बताया कि अब धीरे-धीरे सख्ती कम हो रही है। पहले तो लगा कि अब नेपाल जाना या कारोबार करना ही मुश्किल हो जाएगा। वहीं, शादी-विवाह के सीजन को देखते हुए प्रशासन ने फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन और एसी जैसे भारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर भी विशेष रियायत दी है। कृष्णानगर भंसार कार्यालय के कस्टम ऑफिसर मयंक कुमार कर्ण ने बताया कि नियम के अनुसार, 100 से अधिक मूल्य के सामान पर भंसार प्रक्रिया अनिवार्य है और नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है, लेकिन आम आदमी की बुनियादी जरूरतों और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए उन्हें आने-जाने की अनुमति दी जा रही है। संवाद
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बोले लोग
नई व्यवस्था के चलते बॉर्डर पर रहने वाले स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगी थी। छोटी मात्रा में घरेलू सामान लेकर आने-जाने वाले लोगों से भी टैक्स वसूला जा रहा था, जिससे सीमा क्षेत्रों में नाराजगी बढ़ रही थी। फैसला से अब लोगों को राहत मिली है। - विक्रम चौरसिया, मर्यादपुर, नेपाल

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इस नियम ने छोटे कारोबारियों और सीमावर्ती बाजारों की आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर डाला। कई व्यापारियों ने इसे आम जनता के लिए अनावश्यक आर्थिक बोझ बताया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले से बाजार में रौनक लौट आई है। - संतोष कुमार गुप्ता, उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन, खुनुवां
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नेपाल के सुप्रीम कोर्ट का फैसला सराहनीय है। नेपाल सरकार के 100 रुपये भंसार वाले फैसले से सीमा क्षेत्र के भारतीय बाजारों की स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।अब भारतीय बाजारों में रौनक बढ़ेगी।
- धनंजय सिंह, व्यापारी, बढ़नी

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100 रुपये के सामान पर भंसार लगाए जाने से भारतीय व्यापारियों का ही नुकसान नहीं था बल्कि नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के भी नागरिकों के लिए समस्या थी। लोगों की रोजमर्रा की भारतीय वस्तुएं पसंद व बजट में होती हैं। - राज कुमार अग्रहरी, व्यापारी बढ़नी
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