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शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपित पर था सिर्फ अनुपस्थित रहने का आरोप

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शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपित पर था सिर्फ अनुपस्थित रहने का आरोप
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सिद्धार्थनगर। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े में जिस शिक्षक को एसटीएफ एवं पुलिस ने मुख्य आरोपित बताते हुए गिरफ्तार किया था, बेसिक शिक्षा विभाग की चार्जशीट में उसके विरुद्ध सिर्फ अनुपस्थित रहने का आरोप था। मुख्य आरोपित को शिक्षा विभाग ने मेडिकल के आधार अनुपस्थिति के आरोप से बरी करते हुए बहाल कर दिया। कानून के जानकारों का कहना है कि शिक्षक पर धोखाधड़ी का केस दर्ज होना ही उसकी बर्खास्तगी का पर्याप्त आधार है।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में वर्ष 2018 में फर्जीवाड़े के पर्दाफाश का सिलसिला शुरू हुआ, जो अब भी जारी है। फर्जी अभिलेख के आधार पर शिक्षक की नौकरी हासिल करने के मामले में दो दिन पूर्व ही तीन शिक्षक बर्खास्त किए गए है। वहीं एसटीएफ एवं पुलिस ने वर्ष 2018 में जिस मुख्य आरोपित राकेश सिंह को गोरखपुर से गिरफ्तार किया था और उसे पूरे फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड बताया था, विभाग उसे सिर्फ अनुपस्थित रहने का आरोप मानते हुए बहाल कर चुका है। जबकि उसके फर्जीवाड़े के मामले में शामिल होने के आरोप में सौ से अधिक शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं। कई को जेल भी भेजा गया।
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एसटीएफ एवं पुलिस ने शिक्षक राकेश सिंह को फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपित बताते हुए धोखाधड़ी व जालसाजी के मामले में गिरफ्तार किया था। अधिवक्ता संजय कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि किसी भी कर्मचारी पर धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामले में केस दर्ज होना उसकी बर्खास्तगी का पर्याप्त आधार होता है। वहीं बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि शिक्षक राकेश सिंह पर विभागीय चार्जशीट में सिर्फ अनुपस्थित रहने का आरोप था। उसे बर्खास्त करने का पर्याप्त आधार नहीं था। अनुपस्थिति के सामान्य आरोप के आधार पर उसे लंबे समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता। उसकी तरफ से अनुपस्थिति की अवधि का मेडिकल प्रस्तुत करने पर बहाल कर दिया गया।
आपराधिक एवं विभागीय मामले है अलग
बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि आपराधिक एवं विभागीय मामले अलग-अलग होते हैं। हमारे पास शिक्षक राकेश सिंह के विरुद्ध गंभीर आरोप संबंधी कोई रिकार्ड नहीं थे। उसके जेल जाने की सुनी-सुनाई बात पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। वहीं अधिवक्ता संजय कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि विभागीय जांच करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह आरोपित से संबंधित सभी रिकार्ड, चाहे वह पुलिस से संबंधित हो, उसे चार्जशीट में शामिल करे और उसके आधार पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
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राकेश के अभिलेखों की नहीं हुई जांच
बीएसए देंवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि शिक्षक राकेश सिंह के शैक्षिक अभिलेखों की जांच नहीं हुई है। सवाल उठता है कि जब छह माह से अधिक किसी शिक्षक को निलंबित नहीं रखा जा सकता तो बेसिक शिक्षा विभाग ने किस आधार पर दो वर्ष से अधिक समय तक उसे निलंबित रखा और इतने दिनों तक वह कहां था, इसकी जानकारी भी नहीं की। सवाल यह भी है कि पुलिस एवं एसटीएफ की जांच में शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपित होने और जेल जाने की जानकारी शिक्षा विभाग नहीं हो सकी।
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