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Siddharthnagar News: बुद्ध की भूमि ने दुनिया को योग जैसा उपहार दिया

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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयेाजित संगोष्ठी को संबो​​धित करत
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को वन अर्थ, वन हेल्थ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने कहा कि भारत ने महात्मा बुद्ध की इस पावन भूमि से पूरी दुनिया को योग जैसा अनमोल उपहार दिया है। योग का वास्तविक अर्थ जोड़ना है।
यह मन और शरीर के साथ आत्मा का भी समन्वय करता है। योग न केवल सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को साकार करता है। आज वैश्विक स्तर पर तनाव, स्वार्थ और असंतुलन के माहौल में योग संयम, सहनशीलता, शांति और संवेदनशीलता का मार्ग प्रस्तुत करता है। भारत की सनातन संस्कृति और ज्ञान परंपरा में निहित योग, भारत को विश्वगुरु बनने की दिशा में सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि आज भारत एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी वैश्विक नेतृत्व में योग के माध्यम से अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
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मुख्य अतिथि प्रो. सुमन जैन ने कहा कि योग भारतीय सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है। यह न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का माध्यम है, बल्कि अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने वाला प्रकाश है। योग आत्मा और परमात्मा के मिलन की यात्रा है कर्मों की कुशलता और जीवन जीने की कला भी। गीता और अन्य भारतीय ग्रंथ योग को संतुलित जीवन का मार्गदर्शक बताते हैं। वास्तव में, योग भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और नैतिक मूल्यों का प्रतीक है। विशिष्ट अतिथि प्रो. स्वर्ण लाल वज्राचार्य ने कहा कि योग और महात्मा बुद्ध के दर्शन का गहरा संबंध रहा है।
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बुद्ध दर्शन में जैसी समाधि और प्रज्ञा की अवधारणा है, योग भी उसी का विस्तार है। योग केवल आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि तक विस्तृत है। यह केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, जीवन पद्धति है। आज योग ने पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते हुए वैश्विक स्वरूप ग्रहण कर लिया है और यह मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सर्वकालिक उपाय है। संगोष्ठी का संचालन डॉ. रक्षा ने किया, जबकि संगोष्ठी संयोजक प्रो. नीता यादव ने धन्यवाद ज्ञापन एवं मुख्य नियंता प्रो. दीपक बाबू ने आभार व्यक्त किया।
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