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Siddharthnagar News: सुधरेगी स्वास्थ्य सुविधाओं की सेहत

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। नेपाल बाॅर्डर से सटे सिद्धार्थनगर की गिनती प्रदेश के तराई और अति पिछड़े की श्रेणी में होती है। इसे उबारकर अग्रणी जनपद की श्रेणी में लाने के लिए शासन और प्रशासन का प्रयास जारी है।
सबसे जरूरी और उपयोगी जनपद के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और मजबूत बनाने का है। उस पर काम तो शुरू हुआ है, लेकिन अभी भी कई सेवाएं मिलनी शेष हैं।
साल 2024 में कुछ दिन और घंटे शेष हैं। इस साल में बेहतर की बात करें तो स्वास्थ्य सेवाओं में मेडिकल कॉलेज में 300 बेड की बिल्डिंग शुरू हुई। बांसी का मिनी जिला अस्पताल अस्तित्व में आ गया और डॉक्टरों की तैनाती हो गई। इसके साथ ही सीएचसी पर डिजिटल एक्स-रे की सुविधा बढ़ी।
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नव वर्ष स्वास्थ्य सेवाओं के मायने में खास रहेगा। जिले की कमजोर स्वास्थ्य की सेहत में सुधार की उम्मीद है। दो मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज में ट्राॅमा सेंटर और 40 बेड का एसएसीयू वार्ड अस्तित्व में आएगा। करोड़ों की लागत से शुरू हुई यह परियोजना धरातल पर उतरने के बाद काफी हद तक सुधार हो जाएगा और मरीजों को सहूलियत मिलेगी। वहीं, उन्हें निजी अस्पताल में जाकर जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। ट्राॅमा सेंटर शुरू होने से रुकेगा मरीजों के रेफर होने का सिलसिला : माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में लगभग दो करोड़ रुपये से ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हो गया है। नए साल में इसको शुरू किया जाना है। इसके शुरू होने से मरीमों के रेफर की प्रक्रिया पर विराम लग जाएगा। प्रतिदिन रेफर गंभीर चोट वाले, हार्ट अटैक और ब्रेन स्टोक वाले सहित गंभीर स्थिति वाले 10- 15 मरीजों का यहीं इलाज हो सके। उन्हें गोरखपुर या निजी अस्पताल में नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही तत्काल इलाज शुरू होने से ले जाने के दौरान होने वाली मौत का सिलसिला भी रुक जाएगा।
बच्चों को भर्ती करने में नहीं होगी परेशानी: मेडिकल कॉलेज परिसर की एमसीएच में 40 बेड का एसएनसीयू वार्ड बनाने का काम शुरू हुआ है। 20 लाख से अधिक लागत से बनने वाली इस यूनिट में 70 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। नए साल में यह तैयार हो जाएगा। इसके शुरू होने के बाद बच्चों को भर्ती करने में सुविधा होगी। अभी तक बेड के कम होने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ती है तो रेफर कर देते हैं, या एक बेड पर एक से दो मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। इस वार्ड के शुरू होने से भागदौड़ कम होगी और लोगों को यहीं आसानी से इलाज हो मिलेगा।
बेहतर होगी स्वास्थ्य सेवा, नहीं लगाना पड़ेगा मरीजों को चक्कर : डुमरियागंज तहसील क्षेत्र की 6 लाख से अधिक की आबादी को नए वर्ष में मॉडल पीएचसी मिलेगी। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुमरियागंज के नए भवन में नवंबर में शिलान्यास के बाद से निर्माण कार्य चल रहा है।
जिस पर 69 लाख 44 हजार की लागत रखी गई है। अस्पताल के भवन का निर्माण कार्यदायी संस्था सीएनडीएस से कराया जा रहा है। अस्पताल का भवन छह महीने के अंदर बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय लोगों को इलाज में आसानी होगी।
न्यू पीएचसी में इन कक्षों का होगा निर्माण : डुमरियागंज नगर स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में प्रस्तावित न्यू मिनी पीएचसी भवन के अंदर 2 पीडी रूम, 2 वार्ड रूम, जिसमें 5 महिलाओं के लिए तथा 5 पुरुषों के लिए अलग-अलग बेड तथा 1 दवाखाना, 1 इमर्जेंसी रूम, 1 पैथोलॉजी कक्ष, 1 अतिरिक्त कक्ष और 2 शौचालय, जिसमें 1 पुरुष और 1 महिला के तथा मरीजों और चिकित्सकों के लिए पीने के पानी के लिए टंकी का भी निर्माण कराया जाएगा।
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नहीं लगानी होगी लाइन, आसानी से मिलेगा इलाज: नगर में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ को मॉडल पीएचसी बनाया जा रहा है। पुरानी बिल्डिंग को गिराकर नए भवन का निर्माण शुरू हो गया है। नए साल में नया भवन अस्तित्व में आ जाएगा। इससे लगभग एक लाख की आबादी के साथ शहर के आसपास के 50 से अधिक गांव के लोगों को इलाज में सुविधा मिलेगी।
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