कुदरत की मार झेल रहे किसानों के हाल पर सिंचाई विभाग को भी रहम नहीं आ रहा है। रबी की फसल की सिंचाई करने के किसानों को डीजल के खर्च का अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। पानी के बिना फसल सूख रही है। नहरों में पानी नहीं है। सूखी नहरों को देख किसान को खुद को कोसते दिख रहे है।
पूरे जनपद की अधिकतर नहरे बेपानी हैं। गेहूं की फसल को सिंचाई करने के लिए दो बार सिंचाई करना जरूरी माना जाता है। सिंचित क्षेत्रों के अधिकतर किसान पहली सिंचाई ही नहीं कर पाए है। ऐसा ही नजारा विकास खंड जोगिया क्षेत्र की नहरों का है। बाणगंगा बैराज से निकल कर सजनी हरैया तक जाने वाली नहर सूखी हुई है।
सिंचाई विभाग ने तीन माह पूर्व नहर की सिल्ट सफाई कराई तो किसानों में आशा की किरण जगी। उसके बाद से नहर में पानी नहीं पहुंचा। इस संबन्ध में एक्सईएन यूके सिंह का कहना है कि नेपाल से पानी न आने के कारण आपूर्ति नहीं दे पा रहे हैं। किसानों की समस्या से वाकिफ हैं। वैकल्पिक इंतजाम किया जा रहा है।