सिद्धार्थनगर। सिस्टम की अनदेखी से मरीजों की जिंदगी जा रही है। जन्म लेने वाले मासूम या तो गर्भ में ही दम तोड़ रहे हैं या फिर जन्म के बाद। साथ ही प्रसूताओं की भी मौत हो रही है। जब मरीजों के परिवार की की चुप्पी टूटती है तो सिस्टम जागता है, तबतक बहुत देर हो चुकी होती है। जांच और कार्रवाई के लंबे पेंच के बीच चीखने वाले परिवार थककर खामोश हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही इटवा थाना क्षेत्र के चंद्रमणि के साथ हुआ।
क्षेत्र के सहदेईया गांव निवासी चंद्रमणि ने की पत्नी का बिना जांच और विशेषज्ञ के ऑपरेशन कर दिया गया, नतीजा बच्चे की जान चली गई और मां का इलाज चल रहा है। इस मामले में अस्पताल संचालक और अज्ञात स्टाफ पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है लेकिन यह कोई पहली मौत नहीं है। मौत का सिलसिला जारी है। बंद होने वाले अस्पताल कुछ ही दिन बाद नए रजिस्ट्रेशन के साथ अस्तित्व में आ जाते हैं और फिर उसी धंधे में लगे जाते हैं। इटवा के जिस अस्पताल के संचालक और तथाकथित डॉक्टर पर आरोप लगा है, वह बिना डिग्री का बताया जा रहा है। इटवा, डुमरियागंज के अलावा बलरामपुर जनपद के कुछ निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करने के लिए जाता है, कार्रवाई होने के बाद ऐसी बातें सामने आ रही हैं।
बिचौलिया दबा देते हैं आवाज, चंद जुर्माना के बाद शुरू : दलालों की सेंधमारी से हर माह निजी अस्पतालों में सहेईया गांव निवासी चंद्रमणि जैसे पिता बच्चे और कुछ लोग पत्नी और बेटी को खो रहे हैं। अगर मरीजों की मौत पर शोर उठा और अफसरों के कानों तक पहुंचा तो कार्रवाई के नाम पर अस्पताल सील होता है। वहीं न जाने कितने लोगों की आवाज उठने से पहले पंचायत और बिचौलियों के माध्यम से दबा दी जाती है। मौत बाद शोर पर अफसरों की चुप्पी टूटने के बाद अस्पतालों पर कार्रवाई की जाती है। चंद जुर्माना लगाया जाता है। इसके बाद चंद दिनों बाद अस्पताल फिर खुल जाते हैं।
प्रसूता की चली गई थी जान : नगर के ही एक अस्पताल में सितंबर माह में एक दलाल के जरिये मेडिकल कॉलेज से रेफर की गई महिला को प्राइवेट अस्पताल पहुंचा दिया गया। बिना कागजी कोरम पूरा किए ही उसकी सर्जरी कर दी गई और हालत बिगड़ी तो रेफर कर दिया गया। इस बीच महिला की मौत हो गई। परिवार के लोगों ने हंगामा किया, कार्रवाई की मांग की तो 11 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई।