फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: नौनिहालों के जीवन से बड़ा नियम का बोझ

विज्ञापन
प्रथमिक विद्यालय रमवापुर उर्फ नेबुआ में बारिश में छत से टपक रहा पानी दिवारो में बनी सिडन। संवाद
विज्ञापन
- नियम का झोल, जमींदोज नहीं हो पाते जर्जर विद्यालय भवन
विज्ञापन

- नियमित मरम्मत वाले सरकारी भवन की 50 साल से अधिक है मियाद

- यहां 15 से 20 साल वाले विद्यालय निर्माण में अनियमितता के चलते हो चुके हैं जर्जर

-नियम के अनुसार होता है काम इसलिए जर्जर की श्रेणी में नहीं आते विद्यालय
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सरकारी भवन के जर्जर होने और ध्वस्तीकरण के नियम की दीवार लोगों की जिंदगी से बड़ी है। एक भवन की मियाद अगर नियमित मरम्मत हो रही है तो उसकी आयु 50 वर्ष से अधिक है। इसके बाद जर्जर हाेने पर उसे जमींदोज किया जा सकता है। राजस्थान के झालवाड़ा में जर्जर स्कूली भवन के गिरने से उसके मलबे में दबकर कई मासूमों की जान चली गई।
इसके बाद केंद्र की ओर से विद्यालयों की ऑडिट का निर्देश हुआ है। जिले में विद्यालयों की पड़ताल की गई तो 20 से 30 वर्ष के बीच बने विद्यालयों का बुरा हाल है, और वह जर्जर हो चुके हैं। छत से पानी टपकने के साथ प्लास्टर टूटकर गिरना, दीवारों में दरारें, छत से का सरिया और ईंट दिखने जैसी तस्वीर सामने आ रही है। जबकि, मरम्मत के नाम पर हर साल रुपये खर्च होते हैं।
विज्ञापन

इसके बाद हालात वही हैं। अगर ध्वस्तीकरण करें तो निर्माण और हर साल हाेनी वाली मरम्मत पर सवाल हैं। ऐसे में नियम और की जाने वाले अनदेखी को छिपाने के लिए बच्चों की जिंदगी से खेला जा रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि राजस्थान जैसी घटना यहां भी हो सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि ग्राम पंचायत की ओर से विद्यालयों के कायाकल्प का कार्य किया जा रहा है, जिससे अधिकांश विद्यालयों की सूरत बदल रही है।
-
परिसर में जर्जर भवन, पढ़ाई वाले की हालत बदतर
नगर के विद्यालयों की पड़ताल की गई तो यहां कृष्णानगर मोहल्ले के स्थित प्राथमिक विद्यालय गेट के अंदर दाखिल हुए तो एक भवन जो परिसर में उसे निष्प्रयोज्य लिखा गया है, लेकिन वहां बच्चों का आना- जाना रहता है। वहीं दूसरे भवन को देखा गया तो दीवारों में सीलन, प्लास्टर जर्जर और खिड़की और जंगला टूटा था। पता चला कि इसमें बच्चे पढ़ाई करते हैं। अगर बच्चे पढ़ाई करते हैं तो बड़े खतरे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। कारण भवन के जो हालात हैं, बारिश में छत टपकने के साथ अन्य खतरा भी है। अन्य भवन की हालत सही पाया गया। भवन के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे सका।
-
नामांकन 127 बच्चों का, उपस्थिति का दावा 77, मौके मौजूद पांच बच्चे
शाहपुर। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के प्रथमिक विद्यालय रमवापुर उर्फ नेबुआ में इंचार्ज प्रधानाध्यापक का अजब कारनामा देखने को मिला। मंगलवार को सुबह करीब 10 बजे प्राथमिक विद्यालय रमवापुर उर्फ नेबुआ की भवन की स्थिति देखी गई तो मौके पर विद्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। इंचार्ज प्रधानाध्यापक आलोक त्रिपाठी ने कहा विद्यालय में 127 बच्चों का नामांकन है। इसके सापेक्ष 77 बच्चों की उपस्थिति का दावा कर रहे थे, लेकिन विद्यालय में मौके पर करीब पांच बच्चे मौजूद रहे।
-

एक वर्ष पूर्व हुई छत की मरम्मत फिर भी बारिश में टपक रहा पानी

प्राथमिक विद्यालय रमवापुर उर्फ नेबुआ का भवन पानी से दीवारें सीलन ले रही थीं। विद्यालय भवन के बारे में इंचार्ज प्रधानाध्यापक आलोक त्रिपाठी ने बताया कि विद्यालय में चार कमरे हैं। एक में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा है। तीन में कक्षा-1 से 5 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है। दो में अधिक बारिश होने से छत से पानी टपक रहा है। जबकि एक वर्ष पूर्व ग्राम प्रधान ने छत का मरम्मत कार्य करवाया था। इस संबंध में बीईओ राजेश कुमार से पर संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।
-
एक नजर जर्जर भवनों पर

विभाग के रिपोर्ट के अनुसार हुए सर्वे में 436 जर्जर भवन चिह्नित किए थे। इसमें विद्यालय भवन के अलावा परिसर में पुराने जर्जर भवन शामिल थे। इसमें 170 की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, 149 जर्जर भवनों को ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है, जल्द ही उन भवनों को जमींदोज किया जाएगा।

-
भवन के मरम्मत पर निर्धारित है आयु सीमा
पीडब्ल्यूडी के एक जेई के अनुसार 10 पहले की बनी हुई सरकारी भवन 25 साल में निष्प्रयोज्य मानी जाती है। लेकिन, यही भवन अगर समय-समय इसका देखभाल की गई है, तो 30 से 35 साल में निष्प्रयोज्य होती है। मौजूदा समय में जो भवन बनाए जा रहे हैं। पूर्व में बने भवन से कुछ गुणवत्ता पूर्ण बनाई जा रहे हैं। यह भवन 40 साल के बाद निष्प्रयोज्य हो सकते हैं। लेकिन, इस भवन की बीच-बीच में देखभाल की जाए तो 50 साल के बाद ही निष्प्रयोज्य होंगे। यह तो सामान्य भवनों का है, जहां मरम्मत के लिए धन नहीं मिलता है। लेकिन विद्यालय पर यह नियम इसलिए प्रभावी नहीं होता है कि हर साल मरम्मत के लिए धन आता है और खर्च भी होता है। ऐसे में उसकी आयु सीमा 50 वर्ष तक सही रह सकती है। इसके बाद ही ध्वस्तीकरण होगा।
विज्ञापन

-
बोले जिम्मेदार

जिले में जर्जर विद्यालय भवनों का ध्वस्तीकरण करवाया गया है। अन्य चिह्नित किए भवन जल्द ही गिराए जाएंगे। किसी ऐसे भवन में बच्चे नहीं पढ़ाए जा रहे हैं जो गिरने की हालत में हैं। नए भवन और मरम्मत का कार्य चल रहा है।

-शैलेश कुमार, बीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें