सिद्धार्थनगर। कुत्ताें के हमले जारी हैं, और उनके नोचने की घटनाएं कम होने की बजाय बढ़ गई हैं। हालात यह हैं कि मेडिकल कॉलेज में 35 से 40 मामले रोज पहुंच रहे हैं, वहीं, सीएचसी और पीएचसी की बात करें तो आंकड़ा 200 के पार पहुंच जाता है। जो एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
गंभीर बन चुकी इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने घुमंतु कुत्तों से इंसान की सुरक्षा को लेकर दो बार सख्त टिप्पणी और स्पष्ट आदेश दे चुके हैं। अब तीसरी बार इसे गंभीर बताते हुए कुत्तों की व्यवस्था करने के साथ ही नुकसान पहुंचाने पर मुआवजा देने के लिए भी कहा गया है। लेकिन जमीनी हकीकत आज भी सवालों के घेरे में है। जब देखा गया तो शेल्टर होम बनाने, कुत्तों को पकड़ने और व्यवस्थित पुनर्वास की बात मौखिक और कागजों तक सीमित है। जबकि सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों में इंसान हर दिन जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर पालिका सिद्धार्थनगर की ओर से कुत्तों को पकड़ने का अभियान भी चलाया गया। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार करीब 700 आवारा कुत्ते पकड़े गए, लेकिन इनके लिए न तो स्थायी शेल्टर होम है और न ही अस्थायी ठहराव की मुकम्मल व्यवस्था।
त