संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सूर्यदेव के उत्तरायण होने का उल्लास चौतरफा दिखाई दे रहा है। आसमान में पतंगें उड़ रही हैं, घरों में तिल-गुड़ की मिठास घुली है, लेकिन इसी उत्सव के बीच चाइनीज मांझे की धार, छतों की भीड़ और मिलावटी खानपान सबसे बड़ा खतरा बनकर खड़ा है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि उमंग के पर्व में लापरवाही की कीमत भारी पड़ सकती है।
मकर संक्रांति पर जिले में पतंगबाजी चरम पर है। सबसे बड़ा खतरा चाइनीज मांझे से है, जो पतला होने के साथ बेहद धारदार होता है। यह मांझा गले, हाथ, आंख और चेहरे पर गंभीर जख्मी पहुंचा सकता है। छतों पर बच्चों और युवाओं की भीड़ है, सड़कों पर बाइक सवारों के ऊपर से मांझा गुजर रहा है।
बीते वर्षों में इसी दिन चीनी मांझे से घायल होने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में चोरी-छिपे मांझा बिकने की शिकायतें आज भी सामने आ रही हैं। दूसरी ओर, तिल-गुड़, लड्डू और चिक्की का सबसे अधिक सेवन किया जाता है। खुले बाजारों में रखी मिठाइयों की गुणवत्ता पर सवाल है।
डॉक्टरों के अनुसार संक्रांति के दिन खासकर बच्चों और बुजुर्गों में पेट दर्द, उल्टी और शुगर असंतुलन की शिकायतें हर साल बढ़ती है।
शहर की कई दुकानों पर बिक रहा चीन का मांझा : सिद्धार्थनगर। इन दिनों पतंगबाजी का शौक बच्चों से लेकर बड़ों तक के सिर चढ़कर बोल रहा है। खतरा यह है कि कटने के डर से शौकीन चीन के मांझे से आसमान नापने की कोशिश में जुटे हैं। जबकि चीन का मांझा ब्लेड की तरह धारदार होता है। इस मांझे से पतंग उड़ाने में खुद और अन्य लोगों की जान जोखिम में डालने जैसा है। इसकी मांग इतनी ज्यादा है कि दुकानदार ग्राहक के कहने पर आसानी से इसे मुहैया करा देते हैं। दुकानदारों के मुताबिक, चीन का मांझा मजबूत होता है, इसलिए लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं। एक दुकानदार ने बताया कि हम इसे ग्राहक की मांग पर ही देते हैं।
शहर के साथ ही बांसी, डुमरियागंज, इटवा, शोहरतगढ़ समेत अन्य बाजारों से लेकर कस्बों तक में पतंग की दुकानों पर चीन का मांझा बिकने की जानकारी मिल रही है। बच्चों से जुड़ा खेलने का सामान होने की वजह से कोई ध्यान नहीं देता है। मगर, लापरवाही से इस्तेमाल से कई की जान जोखिम में पड़ रही है। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी चीन का मांझा 200 से लेकर 1000 रुपये तक में बिक रहा है।
सख्त कार्रवाई ही लगा सकती है लगाम : वरिष्ठ अधिवक्ता प्रहलाद जायसवाल बताते हैं कि 2017 में एनजीटी ने चीन के मांझे पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद कहा गया था कि चीन का मांझा बेचने वालों पर एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम) के तहत कार्रवाई की जाए। यदि किसी के खिलाफ इस अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी तो उसे पांच साल की सजा या एक लाख रुपये जुर्माना तक हो सकता है। मगर, इस पर कार्रवाई नहीं की जाती है।