सिद्धार्थनगर। शहर में जैसे ही घड़ी रात के नौ बजाती है, सन्नाटे को चीरती बम जैसी आवाजें लोगों के दिलों की धड़कन बढ़ा देती हैं। मेडिकल कॉलेज रोड से केंद्रीय विद्यालय के आसपास तक, तेतरी बाजार रोड से लेकर अशोक मार्ग मॉडिफाइड बाइकों के साइलेंसरों की धांय-धांय स्टाइल लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है।
तेज रफ्तार, जानबूझकर बढ़ाया गया एक्सीलरेटर और साइलेंसर से निकलने वाली विस्फोट जैसी आवाजें लोगों को परेशान कर रही हैं, लेकिन इनपर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है।
विशेषज्ञ साफ कह रहे हैं, यह सिर्फ न्यूसेंस नहीं, बल्कि गंभीर सड़क हादसों का कारण बन रहा है। हालत यह है कि राहगीर चौंक रहे हैं। मरीज सहम रहे हैं। बच्चे डरकर रो पड़ते हैं। अचानक होने वाला धमाका दिमाग को खतरे का संकेत देता है, जिससे वाहन चालक संतुलन खो सकता है। रात के समय, जब दृश्यता और सतर्कता दोनों कम होती हैं, तब यह खेल और भी खतरनाक हो जाता है।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जावेद आलम का कहना है कि हार्ट और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए ऐसी तेज आवाज जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है। वहीं, मनोवैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि बार-बार ऐसे धमाके बच्चों और बुजुर्गों में स्थायी डर और एंग्जायटी बढ़ा सकते हैं। ऑटोमोबाइल मैकेनिक इरफान अहमद के अनुसार साइलेंसर में अवैध छेड़छाड़ कर ‘फ्री फ्लो’ सिस्टम लगाया जाता है, जिससे इंजन की गैस तेज धमाके के साथ बाहर निकलती है। यह बदलाव न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के खिलाफ भी है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन के मूल ढांचे में बदलाव पर जुर्माना और जब्ती का प्रावधान है, फिर भी शहर में यह ट्रेंड बेलगाम है।