सिद्धार्थनगर। मौसम की तल्खी से एक बार फिर तराई तपने लगा है। लू की मार के बीच दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा है। शहर में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। सोमवार दोपहर 42.4 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। जबकि, न्यूनतम 31.9 डिग्री को छू रहा है। फिलहाल अगले तीन दिन तक तापमान में वृद्धि होगी। इसके बाद बारिश के आसार बन रहे हैं।
बात लोगों की दिनचर्या की करें तो जनपद में लू और गर्मी से सभी तबाह नजर आ रहे हैं। हाल यह है कि जहां सड़कें गुलजार हुआ करती थीं, वहां लू की वजह से कर्फ्यू जैसे हालात नजर आए। दोपहर में बहुत कम ही लोग दिखे। जो लोग निकले वे छतरी और गमछा से खुद को बचाते नजर आए।
वहीं, मेडिकल कॉलेज में हीटवेव के मरीजों के लिए 10 बेड का वार्ड आरक्षित कर दिया गया है। मरीज आने के बाद और बढ़ाने की बात कही जा रही है। जबकि, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्मी में ठंड पानी, पंखा, कूलर और ओआरएस कॉर्नर की पड़ताल की गई तो कुछ स्थानों पर सुविधाएं हैं और कुछ जगह पानी तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि बहुत जरूरी न हो तो सुबह 10 बजे बाद घर से न निकलें और अगर निकलते हैं तो धूप से बचाव की व्यवस्था और पानी लेकर चलें।
मौसम की तल्खी से तपने लगी जमीन
सुबह 10 बजे तक ही पछुआ हवा के साथ पारा चढ़ने लगा और दोपहर के 12 बजे तक सूरज से मानो आग बरसने लगा। हवा के साथ जमीन भी तपने लगी। हालात ये थे कि बाहर निकलने के बाद जैसे लग रहा था की शरीर में पानी ही नहीं बचा है। क्योंकि, हवा तो गर्म थी ही और जमीन भी तपने लगा। दोपहर में तापमान 42.4 डिग्री तक पहु़ंच गया। सोमवार को शहर के उसका मार्ग, बर्डपुर, स्टेशन रोड और कलक्ट्रेट के सामने दोपहर 12 से 2 बजे के बीच संख्या कम दिखी। वहीं, लोग दिखाई पड़े जिन्हें बहुत जरूरी था।
वहीं, अशोक मार्ग पर मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए आने वालाें का सिलसिला जारी रही है। लू से बचने के लिए कोई छतरी लगाए हुए था तो कोई गमछा से मुंह ढके था। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में लू के मरीजों के लिए अलग वार्ड है। साथ ही कूलर और पंखा चलता मिला। वॉटर कूलर की भी व्यवस्था सही मिली।
दो में से एक वाटर कूलर ठीक मिला : शोहरतगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शोहरतगढ़ में मरीजों की सुविधाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है। अस्पताल में दो वाटर कूलर में एक चलता पाया गया। ओपीडी कक्ष के बाहर हाॅल में पंखा चलते हुए मिला। सभी ओपीडी कक्ष में चिकित्सक मौजूद मिले। इमरजेंसी वार्ड में केवल पंखे लगे पाए गए, जबकि इसमें एसी होनी चाहिए। प्रसव कक्ष में साफ-सफाई व्यवस्था पर्याप्त पाई गई।