संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कांशीराम आवास के पास जर्जर पानी की टंकी ने एक किशोर की जान ले ली। दोपहर करीब दो बजे सीढ़ी भरभराकर गिरी और पल भर में मौज-मस्ती और खुशियां चीखों में बदल गईं। नीचे तीन किशोर खून से लथपथ पड़े थे जबकि टंकी के ऊपर दो किशोर पवन (17) और कल्लू (17) दहशत के साए में फंसे रह गए।
सीढ़ी टूटने की वजह से हुए हादसे में नीचे गिरे एक किशोर सिद्धार्थ की सांसें हमेशा के लिए थम गईं तो ऊपर टंकी पर खड़े दोनों पवन और कल्लू के लिए हर मिनट काटना पहाड़ जैसा बन गया। परिवार वालों की आंखें टंकी पर जमी थीं। शाम ढली, अंधेरा घिरा, फिर रात गहराती चली गई, लेकिन पवन और कल्लू के नीचे उतरने की आस अंधेरा होने के साथ धूमिल होने लगी। थके, डरे और ठिठुरते हुए करीब 15 घंटे तक दोनों दहशत के साए में टंकी पर दोनों पड़े रहे। करीब 5:20 बजे सूरज की किरणें फूटने से पहले उनके लिए उम्मीद की किरण नजर आई और सेना के हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट के बीच उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि शहर के कांशीराम आवास के पास जनपद की स्थापना के समय पानी की टंकी बनाई गई थी। लगभग 2018 से जलापूर्ति नहीं की जा रही थी। टंकी चारों ओर से पानी से घिरी हुई थी। बगल में ही कांशीराम आवास में बड़ी संख्या में जिले के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग निवास करते हैं। शनिवार दोपहर तकरीबन दो बजे के आसपास टंकी की सीढ़ी भरभराकर गिर गई। आवाज सुनकर मोहल्ले के लोग दौड़ पड़े। नीचे तीन लोग घायल मिले, जिसमें मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद सिद्धार्थ (13) पुत्र धर्मेंद्र को मृत घोषित कर दिया। वहीं, गोलू (14) पुत्र चंद्रेश और सनी (11) पुत्र बरसाती जो मूल रुप से मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के उडलिया गांव निवासी है, लेकिन अब मां सुनीता के साथ कांशीराम आवास में रह रहा था, उन्हें भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। रविवार को उनकी हालात में सुधार है।
रविवार को रेस्क्यू के बाद जैसे ही दोनों किशोर सुरक्षित हेलीकॉप्टर पर सवार हुए तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। परिवार वाले फूट-फूटकर रो पड़े, लेकिन इस बार ये आंसू राहत के थे।