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मुख्य स्तूप पूजन के साथ बुद्ध को नमन, मनाया 31वां स्थापना दिवस

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कपिलवस्तु में बैठे करते प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या , शिक्षा मंत्री सांसद पाल औध्यक्ष - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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मुख्य स्तूप पूजन के साथ बुद्ध को नमन किया
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जनपद का 31वां स्थापना दिवस मनाया, बुद्ध की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण
देश-विदेश से आए चार सौ बौद्ध भिक्षुओं में कंबल का वितरण किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर/बर्डपुर। जनपद का 31वां स्थापना दिवस रविवार को धूमधाम से मनाया गया। जिला मुख्यालय स्थित बुद्ध की प्रतिमाओं के साथ कपिलवस्तु स्थित मुख्य स्तूप पर पूजन-अर्चन किया गया। इस मौके पर बुद्ध के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया। अंत में देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं में कंबल का वितरण किया गया।
29 दिसंबर 1988 को जनपद का सृजन होने के बाद प्रत्येक वर्ष मनाए जाने वाला स्थापना दिवस विविध कार्यक्रमों के बीच संपन्न हुआ। रविवार को 31वें स्थापना दिवस का शुभारंभ प्रदेश के कैबिनेट मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या की अगुवाई में मुख्यालय के साड़ी तिराहा स्थित बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। इसके बाद शहर में सिद्धार्थ प्रतिमा, बर्डपुर में बुद्ध की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया गया। इसके बाद कपिलवस्तु स्थित मुख्य स्तूप पर पूजन-अर्चन करने के बाद परिक्रमा कर नमन किया गया। कपिलवस्तु बौद्ध बिहार के बुद्ध रत्न ने प्रार्थना की। स्वागत गीत विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तेतरी बाजार के बच्चों द्वारा गाया गया। प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि तथागत की धरती के वासी सौभाग्यशाली हैं। जहां से पूरे विश्व को शांति, अहिंसा व करुणा का संदेश फैला। बुद्ध की उपदेश, दर्शन व विचार कभी करने वाले नहीं हैं। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को तीनों बिंदुओं को आत्मसात करने की आवश्यकता है। प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि बुद्ध के बचपन नाम सिद्धार्थ के नाम पर जनपद का सृजन किया गया। आज वह न होते तो सिद्धार्थनगर की पहचान पूरे दुनिया में शायद नहीं होती। उनके विचार आज भी प्रासंगिक है। सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि दुनिया की सभी समस्याओं का निदान बौद्ध धम्म से ही संभव है। आने वाले समय में आतंकवाद, हिंसा होने का एहसास करते हुए बुद्ध ने 29 वर्ष बाद यहां से संदेश देने के लिए निकल गए थे। भाजपा के जिलाध्यक्ष गोविंद माधव ने कहा कि राजकुमार सिद्धार्थ से बुद्ध तक की यात्रा में वर्णित बिंदुओं को आत्मसात करने की जरूरत है। अंत में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने सभी के प्रति धन्यवाद व आभार जताया। संचालन जय शंकर प्रसाद मिश्रा ने किया। अंत में कुशीनगर, श्रावस्ती, सारनाथ, लखनऊ, सीतापुर आदि बौद्ध क्षेत्रों से आए 400 बौद्ध भिक्षुओं में कंबल का वितरण किया। इस मौके पर एसपी विजय ढुल, सीडीओ हर्षिता माथुर, एडीएम सीताराम गुप्ता, एएसपी मायाराम शर्मा, एसडीएम उमेश चन्द्र निगम, डीओ कृषि सीपी सिंह, सीओ दिलीप सिंह, तहसीलदार सत्येन्द्र सिंह, बीडीओ संजय श्रीवास्तव, भाजपा के लालजी त्रिपाठी, कन्हैया पासवान, घनश्याम मिश्रा, ओम प्रकाश यादव, रामेश्वर पांडेय, नितेश पांडेय, अमित उपाध्याय, सर्वेश जायसवाल, सब्लू साहनी, शिव कुमार मोदनवाल, संतोष मोदनवाल, अजय उपाध्याय, कमलेश जायसवाल, पुनीत जायसवाल, रामसेवक चौरसिया, राजू यादव, जय प्रकाश गुप्ता, सुमित यादव, घनश्याम चौधरी, सुरेन्द्र मौर्य, लेखपाल संघ के राम समुझ व राम करन गुप्ता आदि की उपस्थिति रही।
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चर्चा में रही गैरहाजिरी
जनपद के स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यालय से लगायत कपिलवस्तु में संपन्न कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, डुमरियागंज के विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह समेत जिनके विस क्षेत्र व गृह क्षेत्र में कार्यक्रम होने के बाद भी क्रमश: कपिलवस्तु के विधायक श्याम धनी राही, शोहरतगढ़ के विधायक चौधरी अमर सिंह उपस्थित नहीं रहे। इन सभी की अनुपस्थिति चर्चा में रही।
प्रकाश से सुसज्जित बुद्ध द्वार का उद्घाटन
जनपद स्थापना के दिवस के मौके पर बर्डपुर से कपिलवस्तु की ओर जाने वाले मोड़ पर मुख्य सड़क पर बेहतर प्रकाश से सुसज्जित बुद्ध द्वार का प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने फीता काटकर उद्घाटन किया।
नहीं याद आया अस्थि कलश
प्रत्येक वर्ष मुख्य स्तूप पर पूजन-अर्चन के समय दिल्ली में रखे गए अस्थि कलश को लाने की बात दूर की कौड़ी साबित हुई। इस बार के पूजन-अर्चन कार्यक्रम में संचालक के बार-बार याद दिलाने के बाद भी अस्थि कलश को लाने की बात दूर, किसी ने चर्चा तक नहीं की।
फोटो-
पंचशील के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक
वर्तमान संदर्भों में महात्मा बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता विषयक विचार गोष्ठी
बीते 31 वर्षों में बहुत उपलब्धियां मिलीं, आने वाले समय में और बेहतर होगा
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। भगवान बुद्ध के पंचशील सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। इसके जरिए देश व समाज को नई दिशा दी जा सकती है। मौजूदा परिवेश में उसे अपनाने की आवश्यकता है। ये विचार प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री व जनपद के प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने व्यक्त किए। वह रविवार को लोहिया कला भवन में जनपद स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित वर्तमान संदर्भों में महात्मा बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता विषयक विचार गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि विकास को गति देने के उद्देश्य से ही बड़े जनपदों को विभक्त किया गया, उसमें सिद्धार्थनगर भी शामिल हुआ। बीते 31 वर्षों में विकास के क्षेत्र में अग्रणी उपलब्धि मिली है। आगे भी इस जिले के लिए बहुत कुछ होने वाला है। प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 से डबल इंजन की सरकार का समन्वय होने से सुस्त हो रहे परियोजनाओं का निर्माण तेजी से हुआ है। सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि जनपद स्थापना के उपलक्ष्य में सात दिन महोत्सव कराकर डीएम कुणाल सिल्कू ने जो नींव डाली, उसको बखूबी डीएम दीपक मीणा ने बढ़ाकर भव्य रूप दिया है। बीते जनपद की उपलब्धियों पर नजर डालें तो 31 वर्ष के सफर में जनपद को काफी सफलता मिली है। संभावनाएं सदैव बनी रहनी चाहिए। जनपदवासियों को भी अपेक्षाएं वाजिब हैं। आसपास के जिले का विकास इस जनपद से ज्यादा हुआ है।
इस मौके पर जनपद परिचय-स्थापना दिवस सिद्धार्थनगर पर बौद्धिक परिचर्चा में बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुरेन्द्र मिश्रा, रतनसेन डिग्री कॉलेज बांसी के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर केपी त्रिपाठी, शिवपति इंटर कॉलेज शोहरतगढ़ के प्रधानाचार्य डॉ. नलिनीकांत त्रिपाठी, सिद्धार्थ सिविल बार एसोसिएशन के महामंत्री दिव्य प्रकाश शुक्ला, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यदेव सिंह, समाजसेवी राणा प्रताप सिंह, संतोष श्रीवास्तव, एमपी गोस्वामी आदि ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किया। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने 31 वर्षों में जनपद में हुए विकास कार्यों के साथ ही निर्माणाधीन परियोजनाओं, केंद्र व प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों की प्रगति से अवगत कराया। अतिथियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। बाद में रघुवर प्रसाद जायसवाल सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज तेतरी बाजार के आचार्य दिग्विजय नाथ मिश्र की अगुवाई में बच्चों ने सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किया। संचालन नितेश पांडेय ने किया। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी हर्षिता माथुर, पुलिस अधीक्षक विजय ढुल, अपर जिलाधिकारी सीताराम गुप्ता, अपर पुलिस अधीक्षक मायाराम शर्मा, उपजिलाधिकारी सदर उमेश चन्द्र निगम, पुलिस क्षेत्राधिकारी दिलीप सिंह, परियोजना निदेशक संत कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक अवधेश नारायण मौर्य, बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी ब्रजेश मिश्रा, जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी सीमा पांडेय, शिक्षक अभय श्रीवास्तव, रूपेश सिंह, मनीषा राजपूत, साधना श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त शिक्षक लालता प्रसाद चतुर्वेदी, डॉ. ओपी श्रीवास्तव, श्रीधर पांडेय, सिद्धार्थ शंकर पांडेय, हेमंत उपाध्याय, सच्चिदानंद शुक्ला, डॉ. जया मिश्रा, जयशंकर प्रसाद मिश्रा आदि की मौजूदगी रही।
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खल गई माननीयों की देर से उपस्थिति
लोहिया कला भवन में आयोजित विचार गोष्ठी का समय दो बजे रखा गया था। कार्यक्रम में इससे पहले ही श्रोता पहुंच गए थे। मुख्य अतिथि व अतिथियों के इंतजार में लगभग दो घंटे व्यतीत हो गए। लगभग 4 बजे प्रभारी मंत्री व अन्य मंचासीन हुए। कड़ाके की ठंड में दर्शक दीर्घा से लोगों का बाहर निकलना भी शुुरू हो चुका है। इससे पूर्व स्थानीय वक्ताओं को विचार व्यक्त करने के लिए बुलाकर समय के गैप को भरने की कोशिश हुई। अपने संबोधन में सिद्धार्थ सिविल बार एसोसिएशन के महामंत्री दिव्य प्रकाश शुक्ला ने माननीयों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ऐसे जनप्रतिनिधियों के लिए समय सम्मान दिवस मनाए जाने का अनुरोध करेंगे। जिससे किसी भी कार्यक्रम में श्रोताओं को इंतजार न करना पड़े।
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