सिद्धार्थनगर। इलाज करवाकर स्वस्थ होने की उम्मीद में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में पहुंचने वाले मरीजों की जिंदगी की डोर टूट रही है। कहीं इलाज में लापरवाही तो कहीं इलाज के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप लग रहे हैं। रविवार काे मेडिकल कॉलेज में इंजेक्श्ान लगने के बाद युवक की मौत हो गई थ्ाी। इस मामले में भी दो कर्मचारियों के निलंबन तक ही कार्रवाई सिमटती नजर आ रही है।
हर दो चार माह के भीतर मरीज की मौत पर हंगामा और रिश्वत मांगने के आरोप लगने के बाद भी व्यवस्था सुधर नहीं है। कार्रवाई के नाम आउटसोर्स कर्मियों को बाहर निकालकर पीड़ितों के जख्म पर कार्रवाई का मरहम लगा देते हैं।
मौत पर जिम्मेदार खामोश हैं और उनकी चुप्पी टूट नहीं रही है। इसका नजीता है कि मेडिकल कॉलेज में इलाज में लापरवाही और मरीज से रुपये मांगने के मामले में कम होने के बजाए बढ़ रहे हैं। ऐसा कुछ विभागीय कर्मियों और जागरूक नागरिकों का कहना है।
वहीं, विधि विशेषज्ञ की राय है कि ऐसे में मामले में रिश्वत मांगने का केस तो दर्ज ही होने चाहिए। साथ ही इंजेक्शन लगाने वाले वाली की योग्यता और डॉक्टर सलाह पर लगाया है कि नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए।
नवजात की मौत पर हुआ था हंगामा : लगभग एक साल पहले खेसरहा थाना क्षेत्र के बनकटा गांव निवासी सेना के जवान की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचा था। ऑपरेशन के बाद पत्नी ने बेटे को जन्म दिया। एकाएक बच्चे के लंबी सांस भरने पर उसे एसनएसीयू वार्ड में भेज दिया गया।
यहां ऑक्सीजन लगाना जरूरी था जो समय से नहीं दिया और एक डॉक्टर पहुंचे तो इलाज करने के बजाय बदसलूकी करने और गोरखपुर रेफर कर दिया, जहां रास्ते में दम तोड़ दिया।