- जांच एक अस्पताल में, ऑपरेशन के लिए दूसरे में भेजने का आरोप, हजारों खर्च कराकर भी नहीं मिला भरोसेमंद इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त और सुलभ इलाज का सपना दिखाकर निजी अस्पतालों में मरीजों से कथित तौर पर खेल किए जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि गोरखपुर के कुछ निजी अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों को जांच के नाम पर एक जगह भटकाते हैं और ऑपरेशन के लिए दूसरे अस्पताल भेजकर आर्थिक शोषण करते हैं। इस प्रक्रिया में न केवल मरीजों का पैसा खर्च कराया जा रहा है बल्कि उनकी जान भी जोखिम में डाली जा रही है। लोटन ब्लॉक निवासी एक युवक इसी तरह के झांसे से बाल-बाल बच निकला।
पीड़ित युवक के अनुसार, वह 14 जनवरी को किडनी स्टोन की समस्या लेकर गोरखनाथ मंदिर के पास स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचा। उसके पास पहले से अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट मौजूद थी। डॉक्टर ने रिपोर्ट देखकर भरोसा दिलाया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत ऑपरेशन हो जाएगा। साथ ही सर्जरी से पहले सीटी यूरोग्राफी और कुछ अन्य जांच कराने की सलाह दी गई। युवक ने डॉक्टर की बातों पर भरोसा करते हुए करीब 10 हजार रुपये खर्च कर जांचें कराईं।
19 जनवरी को वह सभी रिपोर्ट और दस्तावेज लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचा। यहां आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड और अन्य कागजात जमा करा लिए गए। घंटों इंतजार के बाद डॉक्टर ने यह कहते हुए दोबारा जांच लिख दी कि रिपोर्ट अधूरी है। इसके लिए युवक से दो हजार रुपये और ले लिए गए। इसके बाद डॉक्टर ने युवक को पास के ही एक दूसरे निजी अस्पताल भेज दिया। कहा गया कि वहीं आयुष्मान का अप्रूवल होगा और ऑपरेशन भी वही डॉक्टर करेंगे। दूसरे अस्पताल में पहुंचने पर युवक से फिर से अल्ट्रासाउंड और ब्लड जांच कराने को कहा गया। यहां भी अलग से भुगतान कराया गया। शाम होते-होते युवक को बताया गया कि बेड अलॉट हो गया है और जैसे ही आयुष्मान का अप्रूवल आएगा, ऑपरेशन कर दिया जाएगा।
युवक का आरोप है कि जब उसने साफ-साफ पूछा कि आयुष्मान कार्ड से ऑपरेशन किस अस्पताल में होगा तो बताया गया कि ऑपरेशन उसी अस्पताल में किया जाएगा, जहां उसे भर्ती कराया गया है। मजबूरी में उसने वहां भर्ती होना स्वीकार कर लिया, लेकिन अस्पताल के भीतर का नजारा देखकर वह घबरा गया।
मंजर देख डरकर भागा
- युवक के मुताबिक, वार्ड में मौजूद अन्य मरीजों की हालत बेहद खराब थी। एक किडनी स्टोन के मरीज का ऑपरेशन हुए दो दिन हो चुके थे, लेकिन उसके शरीर से लगातार पानी का रिसाव हो रहा था। बार-बार पट्टी बदली जा रही थी और मरीज दर्द से कराह रहा था। परिजनों की शिकायतों के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा था। डॉक्टरों की कथित लापरवाही और मरीजों की दयनीय स्थिति देखकर युवक को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ। उसने खाने का बहाना बनाया और मौका पाकर बाहर निकला। इसके बाद परिजनों को बुलाया और किसी तरह अस्पताल से निकलकर घर लौट आया। युवक का कहना है कि यदि वह समय रहते वहां से नहीं निकलता तो उसके साथ भी कुछ अनहोनी हो सकती थी।
गुमराह करने का आरोप
- पीड़ित युवक ने आरोप लगाया कि गोरखनाथ मंदिर के पास स्थित निजी अस्पताल के डॉक्टर आयुष्मान भारत योजना के नाम पर मरीजों को गुमराह करते हैं। जांच एक जगह कराई जाती है, फिर ऑपरेशन के लिए दूसरे अस्पताल भेज दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीजों से हजारों रुपये वसूले जाते हैं जबकि योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त इलाज देना है।
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पहली बार में नहीं दी गई स्पष्ट जानकारी
- पीड़ित युवक का कहना है कि जब वह पहली बार डॉक्टर के पास गया था, तब डॉक्टर ने इलाज और ऑपरेशन को लेकर कोई अस्पष्ट बात नहीं बताई। सिर्फ जांचें कराने को कहा गया। यदि डॉक्टर पहले ही यह स्पष्ट कर देता कि जांच और ऑपरेशन अलग-अलग अस्पतालों में होंगे तो शायद युवक को लंबी परेशानी और आर्थिक नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता।
जांच के नाम पर ही हजारों का खर्च
- आयुष्मान कार्ड के सहारे गरीब मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर निजी अस्पतालों का रुख करते हैं, लेकिन आरोप है कि कई जगह चिकित्सक सिर्फ जांच के नाम पर ही 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च करा देते हैं। इसके बाद न तो सही इलाज होता है और न ही मरीज को राहत मिलती है। डिस्चार्ज के बाद भी दवा और दोबारा जांच के नाम पर बार-बार बुलाकर पैसे वसूले जाते हैं।